प्रखंड क्षेत्र के किसानों पर इस वर्ष आलू की गिरती कीमतों ने भारी आर्थिक मार डाली है। अच्छी पैदावार के बावजूद उचित बाजार मूल्य नहीं मिलने से किसान गहरे संकट में हैं। हालात ऐसे हैं कि उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है, जिससे किसानों की कमर टूटती नजर आ रही है।
स्थानीय किसानों के अनुसार इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण आलू की फसल अच्छी हुई, लेकिन बाजार में आवक बढ़ने से कीमतों में भारी गिरावट आ गई। जहां पहले आलू 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक बिकता था, वहीं अब कीमत घटकर 4 से 5 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। इससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
किसान रामविलास यादव ने बताया कि एक बीघा में आलू की खेती करने में करीब 10 से 12 हजार रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन मौजूदा कीमतों पर फसल बेचने से लागत भी नहीं निकल पा रही है। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति बनी रही तो अगली बार आलू की खेती करना मुश्किल हो जाएगा।
इसी तरह किसान सह मुखिया प्रतिनिधि विजय सिंह कुशवाहा, उचित सिंह, कुणाल सिंह व अन्य किसानों ने बताया कि बिचौलियों के कारण किसानों को सही कीमत नहीं मिल पाती है। कोल्ड स्टोरेज की कमी और सरकारी खरीद व्यवस्था के अभाव में किसानों को मजबूरी में औने-पौने दाम पर आलू बेचना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि सरकार की ओर से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय नहीं होने के कारण भी उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि सरकार आलू के लिए समर्थन मूल्य तय करे और स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र स्थापित करे ताकि किसानों को राहत मिल सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप नहीं करती है, तो किसानों का रुझान आलू की खेती से कम हो सकता है, जिससे भविष्य में उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
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