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मोहनपुर में ‘आदेश नहीं मानते’ का आरोप: अंचलाधिकारी पर 50 हजार रिश्वत, भू-माफिया से साठगांठ और जान से मारने की धमकी का दावा


गयाजी। जिले के मोहनपुर अंचल से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप सीधे अंचलाधिकारी, मोहनपुर पर हैं। पीड़ित पक्ष का दावा है कि भूमि विवाद सुलझाने के नाम पर 50 हजार रुपए लिए गए। फिर जिला लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश को मानने से इनकार कर दिया गया। यही नहीं डिप्टी सीएम से भी शिकायत की गई लेकिन अब तक मामले का समाधान नहीं हो सका। ऊपर से भू-माफिया से साठगांठ और जान से मारने की धमकी तक की बात कही गई। पीड़ित अशोक कुमार सिंह, ग्राम धलती, थाना-मोहनपुर, जिला-गया ने जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में परिवाद संख्या 435110111012509847 दर्ज कराया था। 24 जून 2025 को जिला लोक शिकायत निवारण अधिकारी ने अंतिम आदेश पारित किया। आदेश था कि अंचल अमीन की नापी रिपोर्ट के आधार पर परिवादी को अपनी जमीन पर मकान और बाउंड्री निर्माण की अनुमति दी जाए। किसी भी प्रकार की धमकी या व्यवधान होने पर संबंधित पक्ष पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 126 के तहत शांति व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश भी दिया गया था। लेकिन आरोप है कि जब अशोक कुमार सिंह आदेश की प्रति लेकर अंचलाधिकारी के पास पहुंचे, तो उन्हें दो टूक जवाब मिला कि हम इस आदेश को नहीं मानते हैं। यहीं से विवाद गहराया। परिवादी का दावा है कि पहले काम कराने के नाम पर 50 हजार रुपए लिए गए। बाद में विपक्षी पक्ष से अधिक रकम मिलने की बात कहकर काम से हाथ खींच लिया गया। फोन पर यह भी कहा गया कि पैसा वापस ले लीजिए, काम नहीं हो पाएगा। अशोक कुमार सिंह का कहना है कि इस बातचीत की मोबाइल रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। आरोप यह भी है कि ली गई रकम अब तक वापस नहीं की गई। मामला सिर्फ आदेश की अवहेलना तक सीमित नहीं है। परिवादी का कहना है कि बृजेश सिंह, ग्राम बघलती और उनके सहयोगी प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत राशि से घर निर्माण में बाधा डाल रहे हैं। लाठी-डंडे के साथ धमकी दी जाती है। परिवार दहशत में है। आरोप और गंभीर तब हो जाते हैं जब कथित तौर पर अंचलाधिकारी के एक दलाल का भी नाम सामने आता है। इसके अलावा बीती 28 जनवरी को बोधगया में डिप्टी सीएम के दरबार मे भी अशोक सिंह ने अपनी शिकायत दर्ज कराई। उनकी शिकायत भी डिप्टी सीएम ने सुनी। मेम्ले को निबटारा कराने का आदेश दिया गया लेकिन अब तक विवाद ज्यों का त्यों बना है।  दावा है कि 29 जनवरी 2026 की रात फोन पर विपक्षियों के साथ साजिश रची गई। महिला सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार कर झूठे केस में फंसाने और मार देने तक की बात कही गई। इसकी भी रिकॉर्डिंग होने की बात कही जा रही है।
अशोक कुमार सिंह ने आशंका जताई है कि उन्हें कभी भी झूठे मुकदमे में जेल भेजा जा सकता है। हत्या तक की साजिश रची जा सकती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायिक जांच की मांग की है। साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई व परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।
अब सवाल बड़ा है। जब लोक शिकायत प्राधिकरण का आदेश ही जमीन पर लागू न हो, तो आम आदमी किस दरवाजे पर दस्तक दे। इधर सीओ रंजीत कुमार से इस मामले में उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कहा कि वे कमिश्नर की कोर्ट में अपील कर सकते हैं। इधर उधर शिकायत करने से क्या होगा। कमिश्नर कोर्ट में अपनी बात रखें।

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