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आजादी के 75 साल बाद भी मुस्लिम टोला को एक सड़क मय्यसर नहीं

 

किशनगंज/सिटीहलचल न्यूज

किशनगंज जिले के सुदूरवर्ती टेढ़ागाछ प्रखंड अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत का वार्ड संख्या-9 मुस्लिम टोला गांव हर साल बाढ़ के समय रेतुआ और गोरिया नदियों से घिरकर टापू में तब्दील हो जाता है। यह इलाका आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। बताते चले कि चिल्हनियां पंचायत को रेतुआ और गोरिया नदियाँ तीन भागों में बाँटती हैं। स्थानीय किसान एवं बुद्धिजीवी—भीम प्रसाद झा, खुशी लाल मंडल, रामनाथ सिंह, दयानंद ठाकुर, लतीफ उद्दीन, महमो उद्दीन, राशिद आलम, माया नंद मंडल, पंचानंद ऋषिदेव, प्रेमलाल मंडल, विनय कुमार सिंह, हरिप्रसाद मंडल आदि ने कहा कि आज़ादी के 75 वर्षों बाद भी रेतुआ और गोरिया नदी पर पुल का निर्माण नहीं हो पाया हर साल बाढ़ के दौरान ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नाव से आना-जाना पड़ता है


ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जिला पदाधिकारी, सांसद, विधायक और संबंधित विभागों को पुल एवं सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिया है। यहां तक कि कुवाड़ी में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम में भी यह मांग उठाई गई थी, लेकिन आज तक इस ओर कोई ठोस पहल नहीं हुई।गांव वालों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार और प्रशासन इस जनहित के मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तो वे सामूहिक रूप से चुनाव का बहिष्कार करेंगे। मुस्लिम टोला के बादल आलम ने कहा कि बाढ़ के दिनों में चिल्हनियां मुस्लिम टोला गांव चारों तरफ से टापू में तब्दील हो जाती है

रोजमर्रे की सामानों के लिए सुहिया हाट जाना पड़ता है लेकिन गोरिया नदी में पर गांव वालों के चंदा के सहयोग से बांस बल्ले के सहारे एक गोल्डन ब्रिज का निर्माण किया गया है, आवागमन करने वाले राहगीरों को जान जोखिम चचरी पुल पार करने की व्यवस्था है। सरकार लाख दावे कर ले लेकिन किशनगंज जिले के टेढ़ागाछ प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत चिल्हनियां पंचायत सड़क पुल पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ग्रामीणों ने कहा कि मुस्लिम टोला गांव में रिश्तेदार भी रिश्तेदारी नहीं करना चाहते हैं। ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ साथ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सड़क निर्माण करवाने की गुहार लगाई है।

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