बैसा/सिटिहलचल न्यूज
पूर्णियांजागरूकता की कमी के कारण अक्सर आग लगी की घटनाएं घटित होती है। उक्त बातें अंचलाधिकारी गोपाल कुमार ने कही। दरअसल मार्च महीने के मध्य से प्रखंड में तेजी से बढ़ रही गर्मी के दृष्टिगत संभावित अग्निकांडों से बचाव को लेकर बैसा अंचल अधिकारी - गोपाल कुमार ने जनसामान्य को बचाव के टिप्स देते हुए सचेत किया है । एवं कई नंबरों को जारी किया है जिस पर आग लगने की स्थिति में बचाव हेतु सम्पर्क किया जा सकता है। उन्होनें कहा कि गर्मी में जब तेज पछुआ हवा चलती है । तो गांवों में अग्निकांड बड़े पैमाने पर होते है । जिसके परिणाम स्वरूप घर, खेत, खलिहान एवं जान-माल को भारी क्षति पहुंचती है। जिला आपदा प्रबंध प्राधिकरण इन घटनाओं से होने वाली क्षति को कम करने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है
अंचल अधिकारी गोपाल कुमार ने बताया कि बहुत छोटी-छोटी सावधानियां बरत कर हम अग्निकांड की घटनाओं को रोक सकते हैं । उन्होंने कहा कि गर्मी में लगने वाली आग से गांव अत्यधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में रसोई घर यदि फूस का हो तो उसकी दीवार पर मिट्टी का लेप अवश्य लगा दें। रसोई घर की छत ऊंची रखी जाए। आग बुझाने के लिए घर में बोर में भरकर बालू अथवा मिट्टी तथा बाल्टी, डब्बा, टैक में हमेशा पानी भरकर अवश्य रखें। हवन आदि का काम सुबह 9:00 बजे से पहले संपन्न कर ले। शॉर्ट सर्किट की आग से बचने के लिए बिजली वायरिंग की समय पर मरम्मत कर लें। मवेशियों को आग से बचने के लिए मवेशी घर के पास पर्याप्त मात्रा में पानी का इंतजाम रखें एवं उनकी निगरानी अवश्य करते रहें। गर्मी के दिनों में दिन में तेज हुआ गर्म हवाएं चलती है इसलिए जहां तक संभव हो गर्मियों में दिन का खाना 9:00 बजे सुबह से पूर्व बना लें तथा रात का खाना शाम 6:00 बजे के बाद बनाएं। बिजली के ढीले तारों से निकली चिंगारी भी आग लगने का कारण बन जाती है
अतएव जहां कही भी ढ़ीले तार दिखें उसकी सूचना बिना देर किये बिजली विभाग को दें। आग लगने पर सर्वप्रथम समुदाय के सहयोग से आग बुझाने का प्रयास करें। आवश्यकता होने पर फायर बिग्रेड एवं प्रशासन को तुरंत सुचित करें। इसके अलावे 101 और 112 पर भी सम्पर्क किया जा सकता है। अगर कपड़ों में आग लगें तो जमीन पर लेटकर या लुढ़क कर उसे बुझाने का प्रयास करें। उन्होंने बताया कि कटनी के बाद खेत में छोटे डंठलों व पराली में आग नहीं लगाएं। किसान बंधुओं से अनुरोध है खेतो में पराली न जलाये। अन्यथा आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की सुसंगत धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।



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