पूर्णियां/बालमुकुन्द यादव
रुपौली : प्रखंड के दर्जनों विद्यालय में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चे आई फ्लू के शिकार हो रहे है।जिस कारण अभिभावकों के साथ ही शिक्षकों की चिन्ता बढ़ गई है ।हालांकि सूचना मिलते ही रेफ़रल अस्पताल से मेडिकल टीम विद्यालय पहुँच कर बच्चों का जांच कर जरूरी दिशा निर्देश दे रही है।गत शुक्रवार को प्रखंड के प्राथमिक विद्यालय मैनमा अनुसूचित जाति में एक साथ 17 बच्चे आई फ्लू के रोग से पीड़ित हो गए ।विद्यालय पहुँचते ही शिक्षकों की नजर बच्चे की आंख पर पड़ी तो बिना समय गंवाए ही विद्यालय प्रधान संजीत कुमार ने रेफ़रल अस्पताल रूपौली के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को सूचना दिया ।सूचना मिलते ही रेफ़रल अस्पताल रूपौली के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नीरज कुमार ने मेडिकल टीम को विद्यालय भेजा ।लेकिन मेडिकल टीम जांच के बाद सिर्फ एन्टी एलर्जी की दवा देकर बच्चे को घर मे आइसोलेट करने की सलाह देकर घर भेज दिया ।बताते चले कि प्राथमिक विद्यालय मैनमा अनुसूचित जाति में कुल 150 बच्चे नामांकित है ।जिसमे 17 बच्चे एक साथ आई फ्लू से पीड़ित मीले ।जिस कारण अभिभावकों के माथे पर चिन्ता की लकीर खींच गए है ।वही बुधवार और गुरुवार को भी बुनियादी विद्यालय टीकापट्टी ,आदर्श मिडिल स्कूल बिरौली सहित दर्जन भर विद्यालय में आई फ्लू के मरीज मिले है ।वहां भी मेडिकल टीम पहुँच कर जांच किया है ।जब इस बावत रेफ़रल अस्पताल रूपौली के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ नीरज कुमार से पूछा गया तो बोले कि सिविल सर्जन कार्यालय पूर्णिया से अभी जो गाइड लाइन मिला है उस हिसाब से काम किया जारहा है ।5 से सात दिनों में स्वतः ठीक हो जाता है
क्या कहते है नेत्र रोग विशेषज्ञ :
अभी पूरे देश मे वायरल कंजक्टिवाईटिस जिसको आँख आना या आई फ्लू भी कहते हैं, फैला हुआ है। चिकित्सकीय भाषा में इसको एडीनो वायराल कंजक्टिवाईटिस कहते हैं।बरसात के मौसम के उपरान्त ऐसा अक्सर प्रतिवर्ष ही होता है, लेकिन इस वर्ष यह रोग महामारी का रूप लेते जा रहा है।
इसके रोकथाम , बचाव एवं उपचार के कुछ टिप्स है
1.वाईरल कंजंक्टिवायटीस आँख की बहुत ख़तरनाक बीमारी नहीं है लेकिन बहुत अधिक संक्रामक है। जो प्रायः प्रभावित रोगियों के संपर्क में आने से या उनके द्वारा प्रयुक्त दैनिक उपयोग की चीजें के इस्तेमाल करने से ( जैसे तौलिया, रूमाल, गमछा, तकिया, हाथ मिलाने, बार बार संक्रमित हाथ से आँख छूने से) संक्रमण होने की संभावना बहुत बढ़ जाती है।इसीलिए जिनकी आँखें प्रभावित हो वे यथासंभव घर में ही रहें और दैनिक उपयोग की वस्तु का आदान प्रदान ना करें। प्रभावित रोगी एवं उनके निकट के सभी लोग अपेक्षित दूरियाँ बना कर रहें और बार बार अपने हाथ को साबुन से धोयें।2.आँख का लाल होना, चुभना, पानी आना, पलक का चिपक जाना, खुजलाना और रौशनी में तकलीफ़ होना इत्यादि इसके प्रमुख लक्षणों में से है
ऐसे लक्षण होने पर घबराएँ नहीं, निकट के अस्पताल या नेत्र चिकित्सक से मिलें। अपने आँख को बार बार ना छुएँ और कदापि नहीं रगड़ें ।3.अपने मन से ग़लत दवा का सेवन हानिकारक हो सकता है। आमतौर पर ७-१५ दिनों में ये बीमारी ठीक हो जाती है। दवा चिकित्सकीय परामर्श से ही लें।4.अत्यधिक जलन होने से साफ़ ठंढा पानी से आँख को आराम मिलता है। 5.यदि तकलीफ़ बढ़ जाये तो ऊँचे नेत्र चिकित्सालय में परामर्श लें।6.घर से बाहर धूप चश्मा का व्यवहार उपयुक्त होगा। 7.यथासंभव शारीरिक दूरियाँ रखें। मरीज़ को दवा डालने में या किसी भी तरह की मदद अवश्य करें लेकिन ऐसा करने के पश्चात अपने हाथ साबुन से अच्छी तरह धोयें। 8.याद रखें स्वच्छता एवं जानकारी ही उपाय है। डॉ अजित कुमार पोद्दार ( एम. एस नेत्र रोग ) चिकित्सा निदेशक अखण्ड ज्योति आई हॉस्पिटल मस्तीचक, पूर्णियाँ , बलिया, समस्तीपुर, पटना ।



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