पूर्णिया/सिटी हलचल न्यूज़
जिले के जी.डी. गोयनका स्कूल के संचालक पीयूष अग्रवाल पर उनके स्टॉफ ने गंभीर आरोप लगाते हुए जहरीला पदार्थ का सेवन कर लिया है। जिसके बाद पूर्णियाँ में हड़कंप मचा हुआ है, वही स्टॉफ का दावा है कि उसने प्रताड़ना से तंग आकर थाना में ही जहरीले पदार्थ का सेवन किया है, जिससे पुलिस के कार्यशैली पर ही उँगली उठने लगी है। स्टाफ का इलाज पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में चल रहा है
पीड़ित अनिल कुमार साहा ने बताया कि वह गुलाबबाग स्थित पीयूष अग्रवाल के लफार्ज सीमेंट के फार्म में काम करता है। उसके ऊपर 30 लाख गबन का गलत आरोप लगाया गया है। गुरुवार को हिसाब करने के लिए उसे रानीपतरा स्थित जी.डी. गोयनका स्कूल बुलाया गया, जहाँ पूर्व से मौजूद मुफस्सिल थानाध्यक्ष के हवाले कर दिया गया। पीड़ित का आरोप है कि 3 दिनों तक उसे मुफस्सिल थाना में पीयूष अग्रवाल और उसके पार्टनर के सामने प्रताड़ित किया गया। साथ ही एक हजार के स्टाम्प पेपर, सादे कागज और ब्लेंक चेक लिया गया। पीड़ित ने बताया कि सभी के प्रताड़ना से तंग आकर थाने में ही जहरीला पदार्थ खा लिया। जिसके बाद सीमेंट कंपनी का ही स्टॉफ दिग्विजय द्वारा उसे पूर्णियाँ मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया
वहीं सारे मामले पर जी.डी. गोयनका स्कूल के संचालक पीयूष अग्रवाल ने पहले इस मामले को जी.डी. गोयनका से अलग बताया। वही पीड़ित स्टॉफ का कहना है कि स्कूल से ही उसे उठाया गया है। पीयूष अग्रवाल का भी आरोप है कि स्टाफ ने गबन किया है जिसका इनके पास साक्ष्य हैं।पूरे मामले में पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध लग रही है। क्योंकि पीयूष अग्रवाल का सीमेंट फर्म गुलाब बाग में है और स्टॉफ का घर भी गुलाबबाग में है। मगर पूरे मामले में मुफस्सिल थाना पुलिस ने कार्यवाई की है। अगर स्टॉफ की माने तो पीयूष अग्रवाल ने पहले से ही थानाध्यक्ष को बुलाकर रखा था, जो उसे थाना ले गई और 3 दिनों तक प्रताड़ित किया। वहीं पीयूष अग्रवाल ने भी मुफस्सिल थाने के ऊपर हैंडओवर करके अपना पल्ला झाड़ लेने की बात कही। वही अब सवाल यह उठता है कि अगर स्टॉफ को पुलिस थाने ले गई तो आखिर वह कहाँ है?



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