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प्रखंड क्षेत्र के कई शौचालय निर्माण अधर में लटका हुआ है, विभाग बेख़बर

 



अमौर/सनोज कुमार 



पूर्णियाँ:अमौर-प्रखंड में लोहिया स्‍वच्‍छ बिहार अभियान अन्‍तर्गत शत् प्रतिशत स्‍वच्‍छता अच्‍छादन हेतु सभी पंचायतों के महादलित/दलित बाहुल्‍य बसावटों/टोलों में आवश्‍यकता अनुसार प्राथमिकता के आधार पर सामुदायिक स्‍वच्‍छता परिसर कलस्‍टर शौचालयों का निर्माण कराया जा रहा है, जो भ्रष्टाचार के दलदल में फंसा दम तोड़ रहा है। इस प्रखण्ड के विभिन्न पंचायतों में बने सामुदायिक शौचालयों के निर्माण में घोर अनियमितायें बरती जा रही है और गुणवत्ता मानक की धज्जिया उड़ाई जा रही है जिससे यहां के प्रखंड विकास पदाधिकारी बेखबर हैं ।


क्षेत्र के ग्रामीणों के अनुसार अमौर प्रखंड के समुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य लोहिया स्वच्छ विहार अभियान के तहत प्रारंभ किया गया था । इसमे आमगाछी दलमालपुर  बड़ाईदगाह  नितेंद्र  बंगरा महदीपुर मच्छट्टा मझुवा हाट  डहुवाबाड़ी बकेनिया बरेली अमौर झोवारी भवानीपुर  खरहिया  तालबाड़ी गंगेली पोठिया  खाड़ी महीनगांव  बिशनपुर  धुरपैली में कुल 28 सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य कहीं दो वर्ष पूर्व तो कही एक वर्ष पूर्व प्रारंभ कराया गया था। प्रखंड के फाइलों में इन पंचायतों में कहीं 2020 के अप्रैल से तो कही 2021 के फरवरी माह से सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य पूर्ण व चालू दिखाया गया है जबकि धरातल पर लगभग दस सामुदायिक शौचालय ही चालू है शेष का निर्माण कार्य अधूरा है । इस प्रखंड में सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य प्रारंभ होने के प्रारंभिक चरणों में ही भ्रष्टाचार हावी हो गया । विभागीय स्तर पर कराई गई जांच के दौरान विभिन्न पंचायतों में वित्तीय अनियमितता की पुष्टि भी हो चुकी है, मगर अब तक जिम्मेदारों के द्वारा सम्बन्धितों पर कार्रवाई नहीं की गई। इस प्रखंड में अधिकांश पंचायतों में संचालित सामुदायिक शौचालय का निर्माण कार्य फाइलों में पूरा है जबकि धरातल पर योजना अधूरा है । क्षेत्र में सामुदायिक शौचालयों के निर्माण के नाम पर पूरी रकम निकालने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया है और आधा अधूरा निर्माण कर योजना राशि संभवतः बंदरबांट कर ली गई है, जो जांच का विषय बनता है अब देखना होगा क्षेत्र में अधूरे पड़े शौचालय निर्माण का कार्य पूरा होता है या नहीं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार क्षेत्र में योजना राशि निकाल लेने के बाद भी अधिकांश सामुदायिक शौचालय का निर्माण अपूर्ण हैं।

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