अमौर/सनोज कुमार
पूर्णियाँ: अमौर प्रखंड की अधिकांश ग्रामीण सड़कें जर्जर अवस्था में है और प्रखंड के 25 पंचायतों के लगभग तीन लाख की आबादी यातायात की गम्भीर समस्याओं से जूझ रही है जिससे यहां के ग्रामीण कार्य विभाग बेखर हैं । प्रखंड क्षेत्र में कहने के लिए पक्की सड़कें अवश्य हैं लेकिन जगह-जगह गड्डों में तब्दील इन सड़कों की स्थिति कच्ची सड़कों से भी बदत्तर है । जहां आये दिन दुर्घटनायें होती रहती है और क्षेत्र के आमलोगों को आवागमन में घोर कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है । इस प्रखंड में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित गेरूआ से रसेली मार्ग, खरहिया से शहनगांव मार्ग, बरबट्टा से सिहालो मार्ग, हलालपूर से सिहालो मार्ग, ज्ञानडोव सुरजापूर से फकीर टोली मार्ग, खाड़ी से सानीटोला तेलंगा मार्ग, हलालपूर से नंगड़ाटोला मार्ग, अमौर से बहादरपूर मार्ग, बालूगंज से नितेन्द्र मार्ग, गंगेली से तरोना मार्ग, खरहिया से एग्छिया मार्ग, रंगरैया मोड़ से बड़ा लालटोली मार्ग, पलसा से लालटोली मार्ग, फुटानी चौक से इसलामपूर, सुरहा चौक से भरगामा भवानीपूर मार्ग, सलता से चिल्हनी मार्ग, आमगाछी, बकेनिया बरेली, नितेन्द्र, मच्छटा, झौवारी, अधांग, तियरपाड़ा, पोठिया गंगेली, धुरपैली, दलमालपूर, भवानीपूर, तालबाड़ी, डहुआबाड़ी पंचायतों के कमोबेश सभी ग्रामीण सड़के जर्जर अवस्था में है
इस मौलिक जनसमस्याओं से यहां के प्रशासन व प्रतिनिधियों को कोई सरोकार नहीं है । ज्ञात हो कि सत्ता में बदलाव के बाद बड़ी-बड़ी घोषणाओं और गुणवत्ता के दावों के साथ बनाई गई इस प्रखंड की अधिकांश पीएमजेएसवाई एवं मुख्यमंत्री ग्रामीण सड़कें एक साल की अवधि में ही घटिया निर्माण के कारण जर्जर व ध्वस्त हो गई है । क्षेत्र में अनेक ऐसी जर्जर सड़के हैं जिसका पांच साल का अनुरक्षण (मेन्टेनेन्स) की अवधि होने के बावजूद संवेदकों द्वारा मरम्मती का कार्य नहीं किया गया है और ग्रामीण कार्य विभाग से सांठगांठ कर तथा कागजी खानापूर्ति कर अनुरक्षण की राशि हजम करने के फिराक में लगे हुए हैं । नतीजतन स्थानीय लोग गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे हैं । क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि ग्रामीण कार्य विभाग इस बात से भलिभांति वाकिफ है
कि यह एक बाढ़ प्रभावित प्रखंड क्षेत्र है जहां हर वर्ष बाढ़ का आना तय है और बाढ़ की आढ़ में सड़क निर्माण की गुणवत्ता को आसानी दबाया जा सकता है । इस प्रकार संवेदक और ग्रामीण कार्य विभाग की सांठगांठ से क्षेत्र में घटिया स्तर का सड़कों का निर्माण हो रहा है, जिस पर गुणवत्ता निगरानी विभाग भी आंख कान मूंद कर स्वीकृति का ठप्पा लगा रही है ताकि योजनाओं की लूटखसोट की बहती गंगा में उन्हें भी हाथ साफ करने का भरपूर मौका मिल सके । क्षेत्र के ग्रामीणों ने इस दिशा में साकारात्मक पहल करने का अनुरोध जिला प्रशासन से किया है।



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