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बैरिया की बेटी ने यूनिवर्सिटी में टॉप कर बढ़ाया क्षेत्र का मान

पूर्णियां/बालमुकुन्द यादव 

पूर्णियां : रुपौली प्रखंड के टीकापट्टी थाना क्षेत्र के बैरिया गांव के मनोज यादव की पुत्री गुंजन कुमारी ने तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर गांधी विचार विभाग में टॉप कर क्षेत्र का नाम रौशन किया है। उसने एमए के सभी चार सेमेस्टरों में रिकॉर्ड अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। टीएनबी कॉलेज ऑडिटोरियम में बुधवार को आयोजित 47वें दीक्षांत समारोह में बिहार के राज्यपाल और विवि के कुलाधिपति राजेन्द्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उसे स्वर्ण पदक और प्रमाण पत्र प्रदान किया। गौरतलब है कि सामान्य परिवार से आने वाली गुंजन कुमारी क्षेत्र की पहली लड़की है, जिसने यूनिवर्सिटी के पीजी डिपार्टमेंट में टॉप कर गोल्ड मेडल हासिल किया है। गांव के ही सरकारी विद्यालय से अपनी प्रारंभिक पढ़ाई के बाद उसने रूपौली के प्रोजेक्ट कन्या उच्च विद्यालय से मैट्रिक और रामपरी युगेश्वर इंटर कॉलेज कुरसेला से इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए वह भागलपुर चली गयी


गुंजन अभी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन  दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में आर्काइव्स मैनेजमेंट से संबंधित प्रोफेशनल कोर्स कर रही है और डीयू या जेएनयू में पीएचडी के दाखिले के लिए प्रयासरत है। अपनी अकादमिक पढ़ाई पूरी करने के बाद वह प्रोफेसर या प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती है। अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिजनों और प्रोफेसरों को देते हुए गुंजन कुमारी बताती है कि गांधी विचार के अकादमिक अध्ययन के अलावे रचनात्मक कार्यों में दिलचस्पी के कारण वह ये मुकाम हासिल कर पायी। वह यूनिवर्सिटी के गांधी विचार विभाग के संस्थापक और पूर्व सांसद पद्मश्री प्रो. रामजी सिंह, सर्वोदय आश्रम कुरसेला के संरक्षक पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव, सर्व सेवा संघ के पूर्व अध्यक्ष अमरनाथ भाई सहित देश के प्रमुख गांधीवादी नेताओं से बहुत निकटता से जुड़ी रही है


हाल ही में वह देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के साथ भी दिल्ली में गांधी विचार पर आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुई है। उसकी इच्छा है कि बिहार के सभी राज्य और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर गांधी विचार विभाग की स्थापना हो।बेटी की इस उपलब्धि पर पिता मनोज यादव गर्व से बताते हैं कि उनकी बेटी इलाके की लड़कियों के लिए एक मिसाल बनकर उभरी है। वे आशा करते हैं कि अब आसपास के गांवों की सामान्य घरों की लड़कियां भी उच्च शिक्षा के लिए आगे बढ़ेंगी और उन लड़कियों को परिवार का समर्थन भी अधिक मिलेगा।

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