पूर्णियां से बालमुकुन्द यादव की रिपोर्ट
पूर्णिया: बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी प्रोफेसर आलोक कुमार ने बयान जारी कर कहा कि दुनिया के सबसे बड़े भूभाग पर शासन करने वाले चक्रवर्ती सम्राट अशोक के ऊपर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले लेखक नाटककार को वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा पद्मश्री जैसे उपाधि से सम्मानित करना भारत के गौरवशाली इतिहास को अपमानित करने जैसा है। प्रोफेसर आलोक ने कहा कि सम्राट अशोक ने तथागत बुद्ध के धर्म को दुनिया में फैलाया। अशोक ने अपने समकक्ष राजाओं को बुद्ध के धर्म समता, स्वतंत्रता, भाईचारा एवं न्याय के विचारों पर शासन-व्यवस्था कायम कर मानवता के सिद्धांत पर चलने की प्रेरणा दिया। अपने पुत्र महेंद्र एवं पुत्री संघमित्रा को एशिया के प्रमुख देशों में धर्म प्रचार के लिए भेजा। सम्राट अशोक के प्रयास से ही श्रीलंका ,चीन, जापान, थाईलैंड, म्यानमार जैसे सैकड़ों देश तथागत गौतम बुद्ध के धम्म से आज विकसित देशों की कतार में खड़े हैं
प्रोफेसर आलोक ने कहा कि भारत के गौरवशाली इतिहास को वर्तमान में आर० एस० एस० विचारधारा से जुड़े इतिहासकार शासन के द्वारा मिटाने का दिन प्रतिदिन निर्णय ले रहा है। ऐसे इतिहासकारों को ही संस्कृति मंत्रालय की ओर से प्रशस्ती पत्र दिया जा रहा है । सम्राट अशोक के प्रपौत्र बृहद्रथ मौर्य की हत्या करने वाले पुष्य मिशृंग के विचारों को देश में फैलाने वाले लोग ही आज सत्ता पर विराजमान है। सम्राट अशोका द्वारा बनाए गए धर्म स्तूप, बौद्ध विहार को नष्ट कर तथागत बुद्ध के विचारों को नष्ट कर एक खास वर्ग के लोगों द्वारा भारत के इतिहास के साथ खिलवाड़ राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है
प्रोफेसर आलोक ने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से ऐसे तथाकथित नाटककार साहित्यकार पर कार्रवाई करने की मांग किया है। साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों में मौर्य कालीन धरोहरों को संरक्षित करने का अभियान विभिन्न राज्यों एवं देशों में चलाने की अपील किया है। प्रोफेसर आलोक ने कहा कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान जैसे देश आज सम्राट अशोक द्वारा बनाए बौद्ध विहार एवं स्तूपों को संरक्षित कर पर्यटन स्थल में विकसित कर रहे हैं। लेकिन भारत की सरकार इन स्थलों को संरक्षित करने के बजाए काल्पनिक अवतारों की मूर्ति पर देश का हजारों करोड़ राशि पानी की तरह बहा रहा है।
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