पूर्णियां से बालमुकुन्द यादव की रिपोर्ट
पूर्णिया : कड़ाके की ठंड को देखते हुए समाजसेवी रविंद्र कुमार साह प्रतिदिन की तरह आज भी अपने सहपाठियों के साथ कंबल बांटते हुए रेलवे जंक्शन पहुंचे। जंक्शन के अंदर जरूरतमंद लोगों को कंबल देते हुए उन्होंने देखा कि एक लड़की कोने में बैठ के चादर से अपना मुंह ढक के सिसकते हुए रो रही थी। कंबल देने के क्रम में रविंद्र कुमार साह ने उनके पास पहुंचे और उनसे बात करने की कोशिश किया लेकिन वह कुछ बोल नहीं पा रही थी काफी घबराई और डरी हुई थी। इसी बीच रविंद्र कुमार ने उनका मोबाइल लेकर उन नंबरों पर बात किया जिनसे उनको बार-बार कॉल आ रही थी। बातचीत से पता चला कि एक व्यक्ति जो अपने आप को इस लड़की का नाना बता रहे थे वह पश्चिम बंगाल से है और जो व्यक्ति इन्हें अपने पास जालंधर से बुला रहे थे वह इनका कोई खास पहचान का नहीं है
काफी देर तहकीकात करने के बाद रविंद्र कुमार साह और उनके साथियों को लगा कि यह लड़की बहला-फुसलाकर इसे बंगाल भेजा जा रहा है। फिर इन लोगों ने उसे समझा-बुझाकर अपने गाड़ी में बिठा कर लाइन बाजार मस्जिद के पास पहुंचे और वहां मिल्लत फाऊंडेशंस के युवाओं से संपर्क किया क्योंकि यह बच्ची मुस्लिम थी। मिल्लत फाऊंडेशंस के युवाओं ने अपने कुछ बुजुर्गों को बुलाकर बगल के मुस्लिम लड़कियों का छात्रावास में उसे रखवा दिया और दूसरे दिन सुबह उनके घर वालों को खबर किया गया। जानकारी मिलने के बाद बच्ची की मां, उसके नाना, उसके पिता, उसके भाई लोग आए और तब जाकर पूरी बात की तहकीकात हुई कि यह लड़की बगल की किसी महिला के बहकावे में आकर अनजान व्यक्ति के लिए घर छोड़कर भाग गई
थी जो शायद बंगाल के किसी व्यक्ति के हाथों यह बिक जाती। घर से निकलने के बाद बच्ची को अपनी गलती का एहसास हुआ। घरवालों से मिलने के बाद बच्ची द्वारा सब से माफी मांगी और बच्ची को उनके पिता और परिवार को सकुशल सुपुर्द कर दिया गया। समाजसेवी रविन्द्र कुमार साह ने कहा कि यह समाज के लिए बहुत बड़ी सोचने की विषय है की गांव घर में इस तरह के वारदात को दोबारा घटने ना दिया जाए। सबों ने रविंद्र कुमार साह की सूझबूझ का साधुवाद दिया।
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