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घोषणा के बाबजूद भी किसानों का धान खरीद नहीं: प्रो.आलोक

पूर्णियां से बालमुकुन्द यादव की रिपोर्ट

पूर्णियां : बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय अध्यक्ष सह किसान संघर्ष समन्वय समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर आलोक कुमार ने गत 1 नवंबर से बिहार सरकार द्वारा धान अधिप्राप्ति करने की घोषणा को लगभग 2 माह बीत जाने के बाद भी किसानों को अपने धान को स्थानीय बाजारों में 1100 से 1200 प्रति कुंटल पर बेचने पर मजबूर होने पर खेद प्रकट किया है। काफी मशक्कत के बाद कुछ जागरूक किसान पैक्सों में अपना धान 15 से 10 केजी कटौती के बाद बेच पा रहे हैं। बैंकों के सी०सी० ( कैश क्रेडिट) नहीं होने का बहाना बनाकर भुगतान में 10 से 15 दिनों का समय लिया जा रहा है


सरकार के प्रशासनिक तंत्र उसना एवं अरवा चावल का झमेला खरा कर किसानों के धान अधिप्राप्ति में बाधा उत्पन्न कर मिलरों के शर्तों पर किसानों से कुछ खास किस्म के मोटे धान की खरीद का पैक्सों पर दबाव बना रहा है ,जिससे पतले अच्छे किस्म के धान को पैक्स लेने से मना कर देता है। जबकि किसान ज्यादा कीमत प्राप्त करने के लिए अच्छे किस्म के पतले धान की खेती करते हैं। भारत सरकार ने मोटा धान का एम०एस०पी० 1940 प्रति कुंटल तथा पतला अच्छे किस्म का एम०एस०पी० 1960 रुपए निर्धारित किया है। जिले में मात्र 5 बडे़ चावल मील पर जिले भर के 251 पैक्सों का भार मिलींग के लिए है। सहकारिता क्षेत्र के कुछ छोटे चावल मिल जो अरवा चावल तैयार करते हैं वहां भी मिलिंग नहीं हो रहा है

प्रोफेसर आलोक ने बिहार सरकार के ऊपर बिना तैयारी के धान अधिप्राप्ति की घोषणा कर किसानों को सिर्फ लुभाने का कार्य करने का आरोप लगाया है। जब किसान अपना धान बाजार में बेच चुके होते हैं तब प्रशासनिक तंत्र के द्वारा बाजार एवं बिचौलियों से चावल खरीद की खुली छूट पैक्सों को देकर एस०एफ०सी० -एफ०सी०आई० के बीच कागजी हस्तांतरण कर धान अधिप्राप्ति का लक्ष्य पूर्ति की घोषणा माननीय मुख्यमंत्री के द्वारा किया जाता है। प्रोफेसर आलोक ने माननीय मुख्यमंत्री नीतीश जी से सरकारी एवं निजी क्षेत्रों में पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर चावल मिल स्थापित करने के लिए बेरोजगार उद्यमी को 50% अनुदान राशि देकर अगले वर्ष के लिए मिलिंग की सुविधा दिलाने का मांग किया है ।साथ ही राज्य सरकार किसानों को अलग से क्षतिपूर्ति के लिए पूर्व की भांति 50 से ₹100 प्रति कुंटल बोनस देने की मांग की है।

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