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प्रशासन से न्याय न मिलने पर लालकार्डधारी ने मानवाधिकार आयोग से लगाई गुहार

Araria news
फारबिसगंज (अररिया):- अपने ही घर में बेगाने की जिंदगी जीने को मजबूर है गरीब परिवार। न्याय के लिए दर दर भटक रहे परिवार बरसात के मौसम में टूटे फूटे घर में रहने को विवश है। आखिर कौन देगा सहारा जबकि सरकार द्वारा गरीबों के उत्थान के लिये न जाने कितने योजनाओं का ढिंढोरा पीटा जाता है। गरीबों को न्याय मिले इसके लिये जनता दरबार तक लगाया जाता है। किंतु ये सब धरातल पर दिखाई नही देता है। जिसका जीता जगता उदहारण फारबिसगंज प्रखंड केे हरिपुर पंचायत में देखा जा सकता है। 65 वर्षीय गंगा मेहता के टूटे फूटे घर देख कर आप भी सोच में पड़ जायेंगे। इस बाबत गंगा मेहता ने बताया कि वह एक गरीब लाल कार्ड धारी 65 वर्षीय बूढ़ा व्यक्ति है। उन्हें चार पुत्री हैं। वे मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण पोषण करता है। बताया कि निम्नांकित भूमि लाल कार्ड से प्राप्त हुआ है जिसका लगान 2020-21 तक प्राप्त है। जिसमें घर दरवाजा बना कर रह रह था कि विपक्षी महेंद्र मेहता पिता स्वर्गीय दरप लाल मेहता इत्यादि हरिपुर पंचायत द्वारा मेरे घर से मुझे बेदखल कर दिया गया तथा मेरे टूटे फूटे घर को बनाने नहीं दिया जा रहा है। जिसके न्याय हेतु सक्षम न्यायालय में जाना पड़ा। जहां मेरे पक्ष में आदेश पारित हो गया परंतु अंचलाधिकारी फारबिसगंज संजीव कुमार द्वारा विपक्षी से मिलीभगत कर लाल कार्ड भूमि को आधा-आधा बांट लेने को कहा जाता है तथा मेरी ही टूटी घर को बनाने की बात कह कर विपक्षियों का मनोबल बढ़ा दिया गया है। जबकि विपक्षीगन को अपनी खतियानी भूमि 30 डिसमिल है। उसके बाद भी मेरे लाल कार्ड भूमि को हड़प कर उस पर घर बना दिया गया है। बताया कि मेरे भाई को कई बार मारपिट कर हाथ पैर भी तोड़ दिया गया है। जिसकेेेे कारण 7 से 8 मुकदमा न्यायालय में लंबित है। पीड़ित ने अपने पक्ष में न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश की प्रति भी उक्त आवेदन के साथ सलंग्न किया है। 
लाल कार्ड 1976 से प्राप्त लगान 2020-21 का रसीद का कॉपी, मौजा हरिपुर खाता 613 खेसरा 268, 266, 267 रकवा 0.44 डिसमिल अंकित है। पीड़ित ने पारित आदेश भूमि सुधार उपसमाहर्ता फारबिसगंज द्वारा भूमि विवाद वाद संख्या 243/2011-12, आयुक्त पूर्णिया प्रमंडल पूर्णिया द्वारा वाद संख्या 06/2013-14 पारित आदेश। भूमि सुधार फारबिसगंज इजराय द्वारा नापी की गई प्रतिवेदन, अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा धारा 144 द0प्र0स0 के तहत पारित आदेश वाद संख्या 679 एम/2014, मुंसफ न्यायालय अररिया द्वारा दीवानी वाद संख्या 09/ 2015 में वादी द्वारा दायर वाद की कार्यवाही को खारिज किया गया है
बावजूद इसके अंचलाधिकारी संजीव कुमार द्वारा मुझ गरीब को लाल कार्ड धारी वाली जमीन में हस्तक्षेप कर कहा जाता है कि उक्त भूमि दोनों पक्ष बराबर दो हिस्सों में बांट लो तुम्हारा घर बनने दिया जाएगा।बताया कि ऐसी परिस्थिति में अपना घर नहीं बन पा रहा हूं। बरसात के मौसम में टूटे-फूटे घर में रहने को मजबूर हूं। पीड़ित ने कहा कि थक हार कर वे लोग मानव अधिकार आयोग बिहार पटना को एक आवेदन दिया है। जिसमें कर्मचारी से बने अंचलाधिकारी फारबिसगंज द्वारा विपक्षी के साथ मिलीभगत कर मुझ लालकार्डधारी को भूमि से बेदखल करने की कोशिश की बात कही है। साथ उक्त जमीन से जुड़े सारे दस्तावेजों की कॉपी भी सलग्न किया है। पीड़ित  ने आयोग से आग्रह किया कि मेरे लाल कार्ड भूमि पर न्याय दिलाने में जो कार्रवाई की जाए उस कार्रवाई में मुझे भी उपस्थिति में रखा जाए। क्योंकि मैं ऊपर के दरबार में बहुत बार आवेदन दिया हूं जो नीचे आकर पत्राचार हो जाता है। जिस कारण मुझे न्याय नहीं मिल पाता है साथ ही कहा कि ऐसे भ्रष्टाचार पदाधिकारी को दंडित किया जाए जो अन्य पदाधिकारियों के लिए भी सबक बन सके। ताकि मुझ जैसे और भी पूरे निस्सहाय गरीब को दर-दर ठोकर न खाना पड़े। पीड़ित कहा कि वे लोग न्याय नही मिलने पर सपरिवार अंचल पदाधिकारी से तंग आकर आत्महत्या को विवश हो जाने की भी बात आयोग में दिये आवेदन में दिया है।
बताया कि लॉक डाउन के कारण अब तक आयोग में दिए गए आवेदन का जवाब नहीं आ पाया है। कहा कि इस बीच विपक्षीगण के द्वारा मेरे घर के दरवाजे के पास जबरन नाद एवं भूसी रख दिया गया। जिसको लेकर लोक शिकायत निवारण में भी उक्त मामले की संलग्न कॉपी देते हुए न्याय की मांग की है इधर एसडीओ संजीव कुमार द्वारा अपर समाहर्ता अररिया को उक्त मामले से संलिप्त सभी कॉपी उपलब्ध कराते हुए बताया है कि स्थल निरीक्षण के दौरान पाया कि संपूर्ण रकवा का सिर्फ गंगा मेहता के नाम से लाल कार्ड बनना उचित प्रतीत नहीं होता है। आधा-आधा रकवा का दोनों फरिक के नाम से दखल कब्जा के आधार पर लाल कार्ड बनना चाहिए था। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय महंगू मेहता के वारिसान शंकर मेहता को उक्त जमीन के अलावा बसने लायक अन्य भूमि नहीं है। जबकि द्वितीय पक्ष को 30 डिसमिल जमीन होने की बात बताई जा रही है।

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