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क्या सुशासन बाबू के राज में सरकारी अधिकारी को घुस लेने शराब पीने की है छूट?

रुपौली से विकास कुमार झा कि रिपोर्ट

 रुपौली अंचल में कार्यरत सीआई रामचंद्र मोची के वायरल वीडियो पर कार्रवाई नहीं होने से लगने लगा है कि सुशासन बाबू के राज में सरकारी अधिकारी के लिए अलग कानून आम आदमी के लिए अलग कानून है ।जबकि पूरे राज्य में शराबबंदी कानून लागू रहने के बाद भी जिस तरह से रूपौली अंचल निरीक्षक रामचंद्र मोची के द्वारा जमीन माफियाओं के साथ मिलकर शराब पार्टी की जा रही है। वायरल वीडियो में साफ-साफ देखा जा सकता है कि अंचल निरीक्षक किस तरह से  सुशासन बाबू के शराब बंदी का  मजाक बना रहे हैं। हो भी क्यों ना इतने दिनों के बाद भी कार्यवाही नहीं होने से एक बात तो स्पष्ट हो गई सरकारी अधिकारी के लिए अलग कानून है। जिस शराबबंदी कानून के नाम पर पुलिस के द्वारा आम आदमी को उठाकर जेल में डाल दिया जाता है। वही शराब बंदी कानून अधिकारियों के नाम पर पंगु साबित होती है। आपको बताते चलें अंचल निरीक्षक रामचंद्र मोची शराब पीते एक वीडियो काफी दिनों पहले वायरल हुई थी ।जिसके बाद वरिय अपर समाहर्ता तारिक इकबाल के द्वारा उप समाहर्ता धमदाहा मोहम्मद शाह जहां को जांच का आदेश दिया था ।जिसके बाद उप समाहर्ता धमदाहा मोहम्मद शाहजहां के द्वारा भौतिक जांच कर रिपोर्ट जिला को सौंपी गई थी ।लेकिन आज तक उस पर किसी भी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई ,जिससे लगता है यह मामला भी अब भ्रष्टाचार का शिकार हो गया हो। जबकि उस समय उप समाहर्ता शाहजहां बताया था कि जांच में वायरल वीडियो सही पाया गया। वही पुर्णिया पुलिस के द्वारा अब तक शराबबंदी कानून के तहत अंचल निरीक्षक पर एफ आई आर दर्ज नहीं करना घोर लापरवाही को दर्शाता है। वही वायरल वीडियो में अंचल निरीक्षक रामचंद्र मोची यह कहते स्पष्ट सुनाई देते हैं की तत्कालीन सीईओ भी इस मामले में ₹ एक लाख  नजराना लिए थे। तो वही शराब के नशे में धुत अंचल निरीक्षक क्या एमएलए क्या एमपी सभी के प्रति अमर्यादित शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं वायरल विडियो में फिर भी कार्रवाई नहीं होना समझ से परे।

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