बिहार के शिक्षा विभाग में पदस्थापित एक महिला अधिकारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला सामने आने के बाद आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। किशनगंज जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) के पद पर कार्यरत रूबी कुमारी और उनके पति गौरव कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में मंगलवार को कटिहार और किशनगंज के चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू कटिहार में जमीन की खरीदारी और करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए बहुमंजिला अपार्टमेंट का है। जांच एजेंसी के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, दंपती ने अपनी ज्ञात आय के वैध स्रोतों से 2 करोड़ 45 लाख 84 हजार रुपये अधिक की संपत्ति अर्जित की है। यह उनकी ज्ञात आय से लगभग 87.49 प्रतिशत अधिक बताई गई है।
नियोजित शिक्षिका से बिहार शिक्षा सेवा की अधिकारी तक का सफर
उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, रूबी कुमारी पहले नियोजित शिक्षिका के रूप में कार्यरत थीं। इसके बाद बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 56वीं से 59वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से वर्ष 2018 में उनका चयन बिहार शिक्षा सेवा में हुआ।
वर्ष 2019 में उनकी पहली पदस्थापना पूर्णिया जिले में हुई। इसके बाद वर्ष 2023 में वे कटिहार में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) के पद पर तैनात हुईं। वर्ष 2025 से वे किशनगंज में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी के रूप में कार्यरत हैं।
दूसरी ओर, उनके पति गौरव कुमार वर्ष 2004 में रेलवे में ग्रुप-सी के तहत सहायक लोको पायलट के पद पर नियुक्त हुए थे। वर्तमान में वे कटिहार स्टेशन पर कार्यरत हैं।
कटिहार में जमीन की खरीदारी: 2022 से 2025 तक कई रजिस्ट्रियां
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, दंपती ने कटिहार के अलग-अलग मौजों में आवासीय और व्यावसायिक जमीन खरीदी। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री अलग-अलग समय पर पति और पत्नी के नाम कराई गई। उपलब्ध दस्तावेजी विवरण के अनुसार प्रमुख खरीदारी इस प्रकार है:
1. 6 जुलाई 2022: गौरव कुमार के नाम रामपुर हसनगंज मौजा में खाता संख्या 47 और खेसरा संख्या 374 के तहत 20 डिसमिल आवासीय जमीन की खरीद की गई। इसकी रजिस्ट्री 10 लाख रुपये में हुई।
2. 6 जुलाई 2022: इसी दिन उसी मौजा और खेसरा क्षेत्र में गौरव कुमार के नाम 90 डिसमिल आवासीय जमीन की दूसरी रजिस्ट्री कराई गई। इसकी कीमत 45 लाख रुपये बताई गई है।
3. 29 मई 2024: कटिहार के मधुरा बुद्ध चौक स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी में 2 डिसमिल जमीन पर बने व्यावसायिक निर्माण की खरीद की गई। इसकी रजिस्ट्री 16.51 लाख रुपये में हुई।
4. 29 मई 2024: इसी दिन बुद्ध चौक क्षेत्र में गौरव कुमार के नाम 1.5 डिसमिल व्यावसायिक भूखंड 8.75 लाख रुपये में खरीदा गया।
5. 7 दिसंबर 2024: रूबी कुमारी के नाम रामपुर हसनगंज में 8.9 डिसमिल व्यावसायिक जमीन की रजिस्ट्री 7.51 लाख रुपये में कराई गई।
6. 19 दिसंबर 2024: रूबी कुमारी के नाम रामपुर हसनगंज के खाता संख्या 47 और खेसरा संख्या 600 में 34 डिसमिल आवासीय जमीन खरीदी गई। इसकी कीमत 17 लाख रुपये बताई गई है।
7. 5 जून 2025: रूबी कुमारी के नाम 80 डिसमिल व्यावसायिक जमीन की रजिस्ट्री कराई गई। इसके लिए 61 लाख रुपये की कीमत दर्ज बताई गई है।
8. 6 जून 2025: इसके अगले ही दिन रूबी कुमारी के नाम 61 डिसमिल व्यावसायिक जमीन की एक और रजिस्ट्री हुई। इसकी कीमत 46 लाख रुपये बताई गई है।
9. 20 जून 2025: गौरव कुमार के नाम रामपुर हसनगंज में 17.70 डिसमिल आवासीय जमीन की रजिस्ट्री कराई गई।
इनके अलावा उपलब्ध जांच विवरण में कटिहार के ऑफिसर्स कॉलोनी क्षेत्र में वर्ष 2018 में करीब 30 लाख रुपये की जमीन खरीदने और बाद में वहां अपार्टमेंट निर्माण का भी उल्लेख है।
30 लाख की जमीन पर बना G+4 अपार्टमेंट, निर्माण पर 2.10 करोड़ खर्च का आकलन
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा कटिहार के पॉश इलाके मिरचाईबाड़ी स्थित ऑफिसर्स कॉलोनी में बने बहुमंजिला अपार्टमेंट की हो रही है।
जांच विवरण के अनुसार, वर्ष 2018 में इस इलाके में लगभग 30 लाख रुपये की जमीन खरीदी गई थी। इसके बाद वर्ष 2024 के दौरान करीब 3200 से 3600 वर्गफुट के क्षेत्र में G+4 अपार्टमेंट का निर्माण कराया गया।
ईओयू के आकलन के मुताबिक, इस बहुमंजिला इमारत के निर्माण पर न्यूनतम 2.10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यानी जमीन खरीदने के बाद उस पर करोड़ों रुपये की लागत से बहुमंजिला निर्माण कराया गया।
जांच एजेंसी अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि इतनी बड़ी निर्माण लागत की व्यवस्था किन स्रोतों से की गई और क्या यह दंपती की घोषित आय के अनुरूप है।
55 लाख का होम लोन, 24.47 लाख का पर्सनल लोन और फिर 10 लाख का कर्ज
अपार्टमेंट निर्माण के लिए वित्तीय व्यवस्था भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध प्राथमिकी संबंधी विवरण के मुताबिक, रूबी कुमारी ने 55 लाख रुपये का गृह ऋण लिया था। वहीं उनके पति गौरव कुमार ने 24.47 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लिया, जिसमें से 22.50 लाख रुपये का भुगतान किए जाने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा वर्ष 2025 में रूबी कुमारी द्वारा 10 लाख रुपये का एक अन्य व्यक्तिगत ऋण लेने और लगभग एक वर्ष के भीतर ब्याज सहित उसे चुकता करने का भी उल्लेख है।
आखिर कैसे जुटाई गई करोड़ों की संपत्ति? अब इन सवालों के जवाब तलाश रही जांच एजेंसी
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक सरकारी अधिकारी और रेलवे कर्मचारी के रूप में कार्यरत उनके पति की वैध कमाई से इतनी जमीन और बहुमंजिला इमारत कैसे खरीदी और बनाई गई?
क्या जमीन की खरीदारी के लिए इस्तेमाल की गई रकम वेतन और बचत से आई? क्या इसके पीछे बैंक ऋण, अन्य निवेश या कोई अतिरिक्त आय का स्रोत है? क्या संपत्तियों के बाजार मूल्य और रजिस्ट्री मूल्य में बड़ा अंतर है? इन सभी पहलुओं की जांच जरूरी है।
प्रारंभिक जांच में ज्ञात आय से 2.45 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति होने का आकलन सामने आया है।
चार ठिकानों पर छापेमारी, दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच
विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी अधिपत्र प्राप्त करने के बाद पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में टीमों ने मंगलवार को अलग-अलग ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।
इस कार्रवाई के दायरे में कटिहार स्थित आवास और अपार्टमेंट तथा किशनगंज में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय और किराये के आवास सहित चार ठिकाने शामिल हैं।
जांच एजेंसी संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और अन्य वित्तीय लेनदेन की पड़ताल कर रही है। छापेमारी में मिले दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की जांच की जाएगी।
फिलहाल इस मामले में रूबी कुमारी और उनके पति पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है। जांच पूरी होने और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनकी संपत्ति का वास्तविक स्रोत क्या है और किन संपत्तियों को आय से अधिक संपत्ति के दायरे में रखा जाएगा।
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