कटिहार /सिटी हलचल न्यूज़
जिस बेटी को माता-पिता ने लाड़-प्यार से पालकर बड़ा किया, जिसकी खुशियों के लिए परिवार ने सपने संजोए, उसी बेटी के प्रेम विवाह करने पर परिजनों ने उससे रिश्ता तोड़ने का फैसला कर लिया। मामला इतना बढ़ा कि पिता और भाई ने कथित तौर पर जीवित बेटी का ही श्राद्धकर्म और पिंडदान कर दिया। इस घटना ने पारिवारिक रिश्तों, जातिगत सोच और नई पीढ़ी के अपने जीवन के फैसले लेने के अधिकार को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।यह मामला कटिहार जिले के कदवा थाना क्षेत्र की कंटिया पंचायत अंतर्गत निझरा गांव का बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, गांव निवासी श्याम ठाकुर की पुत्री सैजल कुमारी ने 23 अक्टूबर 2026 को अजय पासवान के साथ प्रेम विवाह कर लिया। अजय पासवान पहलागढ़ पंचायत की मुखिया सरिता देवी के पुत्र बताए जा रहे हैं। उनके पिता का नाम मुन्ना पासवान बताया गया है, जो मुखिया प्रतिनिधि हैं
जाति की दीवार के सामने प्रेम विवाह बना विवाद की वजह
बताया जा रहा है कि सैजल कुमारी ब्राह्मण समुदाय से आती हैं, जबकि उनके पति अजय पासवान दूसरी जाति के हैं। दोनों के प्रेम विवाह की जानकारी सामने आने के बाद लड़की के परिजनों में नाराजगी फैल गई। परिवार इस विवाह से इतना आहत हुआ कि पिता और भाई ने बेटी को अपने लिए मृत मानते हुए उसका श्राद्धकर्म और पिंडदान कर दिया।परिजनों का कहना बताया जा रहा है कि जब समाज में उनकी प्रतिष्ठा ही नहीं बची, तो ऐसी बेटी के जीवित रहने या न रहने का उनके लिए कोई अंतर नहीं है। उनके इस कदम से गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
एक फैसले से टूटे रिश्ते, खड़ा हुआ सामाजिक सवाल
इस घटना को लेकर गांव और आसपास के इलाके में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा और भावनात्मक आघात से जोड़कर देख रहे हैं, तो कई लोग इसे जातिगत भेदभाव और अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता के बीच टकराव का उदाहरण मान रहे हैं।जिस उम्र में युवा अपने भविष्य, करियर और जीवनसाथी को लेकर फैसले लेते हैं, उसी समय परिवार की अपेक्षाएं और सामाजिक मान्यताएं भी उनके जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में प्रेम विवाह कई बार दो व्यक्तियों के निजी फैसले से आगे बढ़कर पूरे परिवार और समाज के बीच टकराव का कारण बन जाता है।
बालिग होने पर अपनी पसंद से विवाह का अधिकार
स्थानीय लोगों के अनुसार, सैजल और अजय दोनों बालिग हैं और उन्होंने अपनी मर्जी से विवाह किया है। भारतीय कानून के तहत, निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी करने वाले दो बालिग व्यक्ति अपनी पसंद से जीवनसाथी चुन सकते हैं।यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या संतान के अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने पर पारिवारिक रिश्तों को हमेशा के लिए खत्म कर देना उचित है? क्या सामाजिक प्रतिष्ठा रिश्तों से बड़ी हो सकती है? इन सवालों के बीच सबसे अहम बात यह है कि मतभेद होने के बावजूद संवाद और आपसी समझ के रास्ते खुले रहने चाहिए।


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