पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव
पूर्णिया : बिहार की राजनीति में दल बदल और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्णिया के पुराने समाजवादी नेता प्रो. आलोक कुमार ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया है। लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से जुड़े रहे प्रो. आलोक कुमार अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। कांग्रेस ने उन्हें बिहार प्रदेश बुद्धिजीवी एवं नीति समिति का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत किया है। उनके इस राजनीतिक बदलाव को कोसी-सीमांचल में कांग्रेस के संगठन विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।प्रो. आलोक कुमार लंबे समय से राजद में सक्रिय थे और विधान परिषद चुनाव की तैयारी में जुटे हुए थे। बताया जाता है कि उन्होंने कोसी निर्वाचन क्षेत्र में अपनी दावेदारी मजबूत करने के लिए काफी मेहनत की थी। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में मतदाताओं को जोड़ने और वोटर बनाने की दिशा में भी काम किया। हालांकि, अंतिम समय में राजद से उन्हें टिकट नहीं मिला। इसके बाद अब उन्होंने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया है
MLC टिकट की उम्मीद टूटी, कांग्रेस में मिली प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी
राजद में विधान परिषद चुनाव के टिकट के लिए प्रयास कर रहे प्रो. आलोक कुमार को पार्टी से उम्मीदवारी नहीं मिली। इसके बाद उनका कांग्रेस में शामिल होना उनके राजनीतिक सफर का नया अध्याय माना जा रहा है। कांग्रेस ने उन्हें प्रदेश स्तर पर बुद्धिजीवी एवं नीति समिति की जिम्मेदारी देकर संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका सौंपी है।उनकी नई जिम्मेदारी के तहत बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और नीतिगत विषयों से जुड़े लोगों के बीच पार्टी का संवाद मजबूत करने की संभावनाएं हैं।
अब पूर्णिया सदर विधानसभा सीट पर नजर?
प्रो. आलोक कुमार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पूर्णिया सदर विधानसभा सीट को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो सकती हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पूर्णिया सदर सीट से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। यदि वह पूर्णिया सदर से दावेदारी पेश करते हैं तो यह उनके राजनीतिक सफर में एक नया मोड़ होगा। फिलहाल, प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद उनकी प्राथमिकता संगठन में अपनी भूमिका निभाने और क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर होगी
कोसी-सीमांचल में कांग्रेस के संगठन विस्तार पर नजर
कोसी-सीमांचल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे नेताओं का अलग-अलग दलों से जुड़ना क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा रहा है। प्रो. आलोक कुमार के कांग्रेस में आने से पार्टी को क्षेत्र में अपने संगठन को मजबूत करने का एक अवसर मिला है। अब देखना होगा कि उनकी नई जिम्मेदारी का असर पूर्णिया और आसपास के जिलों में कांग्रेस की संगठनात्मक गतिविधियों पर किस रूप में सामने आता है।राजद में विधान परिषद चुनाव की तैयारी से लेकर कांग्रेस में प्रदेश स्तरीय जिम्मेदारी मिलने तक प्रो. आलोक कुमार का यह राजनीतिक सफर चर्चा में है। वहीं, पूर्णिया सदर विधानसभा सीट से उनकी संभावित दावेदारी पर भी अब राजनीतिक नजरें रहेंगी।



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