पूर्णिया : पति अच्छा होने के बावजूद एक महिला अपने ससुराल में रहने को तैयार नहीं थी। परिवार परामर्श केंद्र में जब इसकी वजह पूछी गई तो उसने जो शिकायत बताई, उससे मामला एक नया मोड़ ले गया। महिला का आरोप था कि पति की गैरमौजूदगी में सास, देवर और गोतनी उसके साथ गाली-गलौज और मारपीट करते हैं। पति को इसकी जानकारी देने के बावजूद वह उसके पक्ष में कुछ नहीं बोलता। आखिरकार परिवार परामर्श केंद्र ने ऐसा रास्ता निकाला कि सास ने खुद बहू की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठा ली और विवाद का सुखद समाधान हो गया।मामला बायसी थाना क्षेत्र के मल्हरिया बस्ती का है। पति-पत्नी के बीच विवाद की सुनवाई के दौरान पत्नी ने स्पष्ट कहा कि उसका पति अच्छा है, लेकिन वह ससुराल में नहीं रहना चाहती। इस पर केंद्र के सदस्यों ने उससे पूछा कि जब पति अच्छा है तो फिर उसके साथ ससुराल जाने में परेशानी क्या है?महिला ने बताया कि जब उसका पति घर पर नहीं रहता है, तब सास, देवर और गोतनी उसके साथ गाली-गलौज करते हैं और मारपीट भी करते हैं। उसने कहा कि यदि उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट बंद हो जाए तो वह ससुराल जाने के लिए तैयार है
सास ने खुद ली बहू की रक्षा की जिम्मेदारी
महिला की शिकायत सुनने के बाद परिवार परामर्श केंद्र ने सास को ही बहू की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंप दी। शुरुआत में यह फैसला कुछ अलग जरूर लगा, लेकिन इसका सकारात्मक परिणाम सामने आया। सास ने भी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए बहू को भरोसा दिलाया कि उसके रहते कोई भी बहू के साथ मारपीट नहीं करेगा।सास ने उत्साह के साथ कहा कि बहू की रक्षा करना अब उसकी जिम्मेदारी है। उसने यहां तक आश्वासन दिया कि यदि वह बहू की सुरक्षा नहीं कर सकी तो इसके लिए उसे कानूनी रूप से जिम्मेदार समझा जाए।सास के इस आश्वासन के बाद परिवार के बीच सहमति बनी। इस संबंध में बंधपत्र तैयार किया गया, जिस पर पति-पत्नी, सास, देवर और गोतनी ने अपने-अपने हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान लगाए। इसके बाद सभी खुशी-खुशी परिवार परामर्श केंद्र से विदा हुए।इस तरह केंद्र ने परिवार के भीतर चल रहे विवाद को आपसी सहमति और जिम्मेदारी तय करने के जरिए सुलझा दिया। मामले के समाधान में केंद्र के सदस्य अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, स्वाति वैश्यंत्री, बबीता चौधरी, रविंद्र शाह और नारायण गुप्ता ने अहम भूमिका निभाई।


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