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पुलिस के सामने ट्रैक्टर से उतरवाई खाद, फिर FIR में ट्रैक्टर फरार! कृषि विभाग पर उठे बड़े सवाल

 

पूर्णियां पूर्व/सिटी हलचल न्यूज़ 

पूर्णिया। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बियारपुर पंचायत स्थित उचितपुर चौक पर पश्चिम बंगाल से लाई गई खाद की जब्ती के बाद कृषि विभाग की कार्रवाई और दर्ज FIR के तथ्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल उस ट्रैक्टर को लेकर है, जिसे मौके पर पकड़ने, उससे खाद उतरवाने और दोबारा ट्रक पर खाद लदवाने का उल्लेख कार्रवाई के विवरण में है, लेकिन प्राथमिकी में उसी ट्रैक्टर को मौके से फरार बताया गया है।कृषि विभाग के कृषि समन्वयक उधव कुमार की ओर से मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 229/26 दर्ज कराया गया है। आवेदन के अनुसार 25 सितंबर को गुप्त सूचना पर कृषि विभाग और पुलिस की टीम उचितपुर चौक पहुंची थी। टीम में कृषि विभाग की एसओ बेबी कुमारी, मुफस्सिल थाना के एसआई रवींद्र तिवारी, कृषि समन्वयक उधव कुमार और जिला कोऑर्डिनेटर धनंजय कुमार शामिल थे


ट्रैक्टर पकड़े, खाद उतरवाई और फिर ट्रक पर लदवाई... फिर FIR में फरार कैसे?

आवेदन में बताया गया है कि मौके पर पश्चिम बंगाल नंबर WB59A5682 का ट्रक खड़ा था और उससे खाद दो ट्रैक्टरों में उतारी जा रही थी। कार्रवाई के दौरान ट्रक और ट्रैक्टरों को पकड़े जाने की बात कही गई है। बाद में खाद को दोबारा ट्रक पर लादकर थाना परिसर लाने का भी उल्लेख है।यहीं से FIR की कहानी पर सवाल खड़े होते हैं। प्राथमिकी में दोनों ट्रैक्टरों के मौके से फरार होने का उल्लेख किया गया है। ऐसे में सवाल है कि जब पुलिस और कृषि विभाग की टीम मौके पर मौजूद थी और खाद को ट्रैक्टरों से उतरवाकर दोबारा ट्रक में लदवाया गया, तब वही ट्रैक्टर बाद में मौके से फरार कैसे हो गए?

अगर ट्रैक्टर कार्रवाई के दौरान पुलिस व कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में थे, तो उनके नंबर, मालिक और चालक की पहचान की कार्रवाई क्या हुई? और यदि ट्रैक्टर वास्तव में मौके से फरार हुए, तो उन्हें रोकने के लिए क्या कार्रवाई की गई? इन सवालों का जवाब जांच से ही सामने आएगा। आवेदन में प्रोपराइटर, ट्रक मालिक, दोनों ट्रैक्टर मालिकों और अज्ञात चालकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का अनुरोध किया गया है।वहीं स्थानीय स्तर पर खाद कारोबारी नीरज झा के खिलाफ कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि जांच में उसकी भूमिका सामने आती है तो उस संबंध में कार्रवाई क्यों नहीं हुई—यह भी जांच का विषय है


गोदाम में 1263 बोरी खाद, ट्रक में 600 से ज्यादा DAP

छापेमारी के दौरान दुकान और गोदाम में कुल 1263 बोरी खाद मिलने की बात आवेदन में कही गई है। इनमें 134 बोरी DAP और 50 बोरी MOP के अलावा अन्य प्रकार की खाद भी शामिल बताई गई है।

वहीं पश्चिम बंगाल के दालकोला से आए ट्रक में 600 से अधिक बोरी DAP और करीब 20 बोरी MOP लदी होने की जानकारी दी गई है। विभागीय जांच में ट्रक में लदी खाद से संबंधित आवश्यक बिल, वाउचर और अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जाने की बात कही गई है। आवेदन के अनुसार ट्रक में मौजूद खाद का स्टॉक POS मशीन में भी दर्ज नहीं था।

बता दे कि Fertiliser (Control) Order, 1985 में खाद के कारोबार के लिए निर्धारित authorization/registration और source certificate जैसी व्यवस्थाएं हैं। इसके अलावा dealer के स्टॉक रिकॉर्ड में आपूर्ति के स्रोत और बिल नंबर/तारीख का उल्लेख करने की व्यवस्था भी है।

कृषि विभाग ने आवेदन में बिना वैध दस्तावेज के खाद मिलने की परिस्थितियों को कालाबाजारी और जमाखोरी का संकेत बताया है तथा Fertiliser (Control) Order, 1985 और Essential Commodities Act के तहत कार्रवाई की मांग की है।

7 साल तक की सजा का प्रावधान

मामले में Essential Commodities Act की धारा 7(1)(a)(ii) चर्चा में है। इस प्रावधान के तहत Section 3 के अंतर्गत बनाए गए आदेश के उल्लंघन पर तीन महीने से लेकर सात साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है। कानून में यह भी प्रावधान है कि पर्याप्त और विशेष कारण दर्ज होने पर अदालत तीन महीने से कम की सजा दे सकती है।

ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में खाद की जब्ती हुई, मौके पर पुलिस और कृषि विभाग की टीम मौजूद थी और ट्रैक्टरों से खाद उतरवाकर दोबारा ट्रक पर लदवाने की कार्रवाई हुई, तो FIR में उन्हीं ट्रैक्टरों को फरार क्यों बताया गया?

क्या यह महज FIR लिखने में हुई गलती है, मौके की कार्रवाई और प्राथमिकी के विवरण में कोई अंतर है, या इसके पीछे कोई और वजह है? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।

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