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*चलती ट्रेन में पति की हत्या का सनसनीखेज खुलासा: MVI पत्नी, प्रेमी और सुपारी किलर गिरफ्तार, 34 दिन बाद सुलझी मर्डर मिस्ट्री*




11 जून 2026 की रात खगड़िया-सहरसा रेलखंड पर दौड़ रही जनसाधारण एक्सप्रेस में अचानक गोलियों की आवाज गूंज उठी। मानसी और बदलाघाट स्टेशन के बीच एक यात्री को अपराधियों ने सीने में गोली मार दी। डिब्बे में अफरा-तफरी मच गई, यात्री अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घायल युवक की पहचान बिजली विभाग के ग्रेड-1 तकनीशियन देव कुमार गुंजन के रूप में हुई। उन्हें गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

घटना के तुरंत बाद सामने आई कहानी बिल्कुल अलग थी। बताया गया कि ट्रेन में अपराधी लूटपाट कर रहे थे और विरोध करने पर देव कुमार गुंजन को गोली मार दी गई। मृतक की पत्नी और सुपौल में पदस्थापित मोटर वाहन निरीक्षक (MVI) स्मिता कुमारी ने भी पुलिस को यही कहानी बताई। इसी आधार पर मानसी रेल थाना में प्राथमिकी दर्ज हुई और शुरुआती जांच लूटपाट के एंगल पर शुरू हुई।

लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे कहानी बदलने लगी। रेल जिला कटिहार की एसआईटी, बरौनी रेल अनुमंडल पुलिस और एसटीएफ ने घटनास्थल के अलावा मृतक और उसके करीबियों की गतिविधियों की गहन जांच शुरू की। सबसे अहम सुराग मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और डिजिटल साक्ष्यों से मिला। जांच अधिकारियों ने पाया कि वारदात से पहले और बाद में कुछ संदिग्ध नंबरों पर लगातार बातचीत हुई थी। कॉल रिकॉर्ड, लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों ने पुलिस को उस दिशा में पहुंचा दिया, जहां से पूरे हत्याकांड का पर्दाफाश हुआ।

जांच में खुलासा हुआ कि MVI स्मिता कुमारी का वर्ष 2017 से बिजली विभाग में कार्यरत अजीत कुमार के साथ प्रेम संबंध था। सीतामढ़ी में एकसाथ नौकरी करने में दौरान दोनों की नजदीकियां बढ़ी थी।  आरोपी अजीत कुमार वर्तमान में नालंदा के एकंगरसराय क्षेत्र में बिजली विभाग में ग्रेड-1 तकनीशियन के पद पर कार्यरत है।
 पुलिस के अनुसार, देव कुमार गुंजन दोनों के रिश्ते में सबसे बड़ी बाधा बन चुके थे। इसके बाद पति को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची गई।

रेल एसपी हरिशंकर कुमार ने कटिहार में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि स्मिता कुमारी और अजीत कुमार ने जहानाबाद निवासी राजू कुमार उर्फ धीरज को हत्या की 4 लाख की सुपारी दी थी। योजना के तहत देव कुमार जब अपनी पत्नी से मिलने सुपौल  जनसाधारण एक्सप्रेस से आ रहे थे, इसी बीच  मानसी-बदलाघाट रेलखंड के बीच मौका मिलते ही उन्हें गोली मार दी गई। वारदात को इस तरह अंजाम दिया गया कि मामला ट्रेन में लूटपाट के दौरान हुई हत्या जैसा लगे और किसी को साजिश का शक न हो।

पुलिस के अनुसार, शुरुआत में आरोपियों की योजना सफल होती दिख रही थी। लूट की कहानी के कारण जांच भी उसी दिशा में बढ़ रही थी, लेकिन मोबाइल कॉल डिटेल, लोकेशन ट्रैकिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों ने पूरा खेल बिगाड़ दिया। डिजिटल जांच में मिले सबूतों ने पत्नी और उसके कथित प्रेमी की भूमिका उजागर कर दी। इसके बाद दोनों से सख्ती से पूछताछ की गई, जिसमें हत्या की साजिश की परतें खुलती चली गईं।
संयुक्त कार्रवाई करते हुए रेल पुलिस और एसटीएफ ने स्मिता कुमारी, उसके कथित प्रेमी अजीत कुमार पिता-अशोक साव,साकिन-साहो बिगहा, थाना-घोषी, जिला-जहानाबाद और कथित शूटर राजू कुमार उर्फ धीरज, पिता- जेहल यादव, साकिन-सुजातपुरथाना-घोषी, जिला-जहानाबाद को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे षड्यंत्र का खुलासा हुआ है। मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।

रेल एसपी ने बताया कि आरोपी राजू कुमार का आपराधिक इतिहास भी खंगाला जा रहा है। वह पहले भी कई मामलों में जेल जा चुका है और फिलहाल जमानत पर बाहर था। अनुसंधान अंतिम चरण में है और जल्द ही चार्जशीट दाखिल कर आरोपियों के खिलाफ त्वरित ट्रायल चलाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

करीब 34 दिन तक लूट की वारदात समझी जाने वाली यह घटना आखिरकार एक सुनियोजित हत्या की साजिश निकली, जिसका खुलासा किसी प्रत्यक्षदर्शी ने नहीं, बल्कि मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों ने किया। यही तकनीकी जांच इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की सबसे बड़ी कड़ी साबित हुई।

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