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बकाया पैसे की मांग को लेकर लगभग 1 महीने से घर के बाहर बैठे हैं कोयला व्यापारी धर्मेंद्र सिंह मुन्ना सिंह, घर में रहे महिलाओं ने फेका मिर्ची पाउडर, महिला ने कहा आत्म सम्मान के लिए फेंका मिर्ची पाउडर








गया मे 4 करोड़ 61 लाख रुपये के कथित बकाया भुगतान को लेकर चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मामला गया जिले के इमामगंज नगर पंचायत क्षेत्र के गरेरिया गांव का है। यहां झारखंड के चतरा जिले के कोयला कारोबारी धर्मेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना सिंह पिछले एक महीने से भी अधिक समय से अपने बकाया रुपये की मांग को लेकर संतोष अग्रवाल के घर के बाहर बैठे हुए हैं। धर्मेंद्र सिंह का आरोप है कि उन्होंने संतोष अग्रवाल को बिहार में कोयला बेचने के लिए दिया था, लेकिन कोयला बिक्री के बाद उन्हें उनका भुगतान नहीं किया गया। धीरे-धीरे यह बकाया रकम बढ़कर करीब 4 करोड़ 61 लाख रुपये तक पहुंच गई। धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि उन्हें पूरी रकम एक साथ चाहिए और जब तक उनका पूरा पैसा नहीं मिल जाता, तब तक वह संतोष अग्रवाल के घर के बाहर से नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि वह किस्तों में या धीरे-धीरे भुगतान लेने के लिए तैयार नहीं हैं। इसी बीच रविवार को धर्मेंद्र सिंह एक बार फिर अपने बकाया पैसे की मांग को लेकर संतोष अग्रवाल के घर पहुंचे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और आरोप है कि घर में मौजूद महिलाओं की ओर से उन लोगों पर मिर्ची का पाउडर फेंक दिया गया, जिसका वीडियो भी सामने आया है.हालांकि, इस घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है और लोग बाल-बाल बच गए। वहीं, संतोष अग्रवाल की पत्नी सरिता देवी ने धर्मेंद्र सिंह और उनके साथ मौजूद लोगों पर घर पर हमला करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि आत्मरक्षा में उन्होंने मिर्ची का पाउडर फेंका। महिला ने पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का भी आरोप लगाया है। संतोष अग्रवाल की पत्नी का कहना है कि अगर उनके पति के ऊपर कोई बकाया राशि है, तो वह न्यायालय के माध्यम से धीरे-धीरे उसका भुगतान करने को तैयार हैं। दूसरी ओर धर्मेंद्र सिंह का आरोप है कि संतोष अग्रवाल पिछले एक महीने से अधिक समय से घर से फरार हैं और घर पर उनकी पत्नी, मां और पिता ही मौजूद रहते हैं। फिलहाल, 4 करोड़ 61 लाख रुपये के कथित बकाया भुगतान को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को मिर्ची पाउडर फेंके जाने की घटना के बाद मामला और भी गरमा गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 4 करोड़ 61 लाख रुपये के इस कथित बकाया भुगतान का विवाद कब और कैसे सुलझेगा? क्या दोनों पक्षों के बीच समझौता होगा या फिर यह मामला कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ेगा?


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