परिवार परामर्श केंद्र में शनिवार को एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने कुछ देर के लिए सभी को हैरान भी किया और मुस्कुराने पर भी मजबूर कर दिया। पत्नी का आरोप था कि शादी के करीब चार साल बाद भी वह ससुराल में कम और मायके में ज्यादा रहती है, क्योंकि उसका पति उससे ज्यादा अपनी "भाभी" पर ध्यान देता है और उसे खर्च के लिए एक रुपया तक नहीं देता।
केंद्र में उपस्थित पत्नी ने कहा कि पति दिनभर अपनी भाभी से बातचीत करता है और उसकी बातों को अधिक महत्व देता है। इस पर पति ने तुरंत सफाई देते हुए कहा कि वह झूठ बोल रही है, उसकी कोई भाभी है ही नहीं। वह केवल अपनी मां की बात सुनता है और उनकी हर आज्ञा का पालन करता है। इसके बाद पत्नी ने स्पष्ट किया कि वह सगी नहीं बल्कि चचेरी भाभी की बात कर रही है।
पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसे आर्थिक रूप से कोई सहयोग नहीं करता। वहीं पति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसने पत्नी के नाम बैंक खाता तक खुलवा दिया है, लेकिन वह खाता और उससे जुड़े दस्तावेज हमेशा मायके में रखती है। ऐसे में उसकी गलती कहां है।
दोनों पक्षों की बातें सुनने के बाद परिवार परामर्श केंद्र के सदस्यों ने काफी देर तक समझाइश की। आखिरकार पत्नी इस शर्त पर ससुराल जाने के लिए तैयार हुई कि पति उसके साथ मारपीट नहीं करेगा। पति ने भी यह शर्त स्वीकार कर ली। सहमति बनते ही दोनों के चेहरे पर संतोष दिखाई दिया और मामला सुलझ गया।
मामले के समाधान में केंद्र के सदस्य अधिवक्ता दिलीप कुमार, दीपक, स्वाति वैष्यंत्री बबीता चौधरी, रविंद्र शाह, महिला थाना की पूर्णिमा तथा कार्यालय सहायक आशुतोष ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार परामर्श केंद्र में आज कुल 16 मामले आए। इनमें 3 मामलों में पति-पत्नी के बीच समझौता कराया गया, जबकि 2 मामलों में सहमति नहीं बन सकी। शेष मामलों को आगे की कार्रवाई के लिए न्यायालय भेज दिया गया।
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