भारत-नेपाल सीमा पर मानव तस्करी जैसी गंभीर सामाजिक बुराई की रोकथाम के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) 12वीं बटालियन द्वारा बुधवार को ई कंपनी माफीटोला अंतर्गत फतेहपुर बीओपी में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व इंस्पेक्टर राजकुमार ने किया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं एवं महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान एसएसबी अधिकारियों ने मानव तस्करी के बढ़ते मामलों, इसके दुष्प्रभावों तथा बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि मानव तस्करी एक संगठित अपराध है, जिसमें महिलाओं और बच्चों को बहला-फुसलाकर शोषण का शिकार बनाया जाता है।
अधिकारियों ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी अनजान व्यक्ति द्वारा नौकरी, शिक्षा या बेहतर जीवन का झांसा देकर लोगों को बाहर ले जाने के प्रयासों पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि मानव तस्करी के अधिकांश मामलों में महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाया जाता है।
एसएसबी अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के लापता होने, संदिग्ध आवाजाही या मानव तस्करी से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले तो तत्काल प्रशासन एवं सुरक्षा एजेंसियों को सूचित करें। उन्होंने कहा कि जनसहयोग और जागरूकता से ही इस अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।
यह कार्यक्रम एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट, सेक्टर मुख्यालय एसएसबी रानीडांगा (पश्चिम बंगाल) के निर्देशन में आयोजित किया गया। इस अवसर पर "मानव तस्करी रोकें, समाज को सुरक्षित बनाएं" तथा "समुदायों को सशक्त बनाकर मानव तस्करी की रोकथाम करें" जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को जागरूक किया गया।
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