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बाहर सिविल सर्जन का बोर्ड, अंदर 10 लाख की स्मैक! पूर्णिया में तस्करों का 'सरकारी खेल'



नशे के कारोबारियों का दिमाग कितना शातिर हो सकता है, इसका हैरान करने वाला उदाहरण पूर्णिया में देखने को मिला है। बाहर से देखने पर स्कॉर्पियो किसी सरकारी अधिकारी की गाड़ी लग रही थी। गाड़ी के आगे बड़े अक्षरों में "सिविल सर्जन, मधेपुरा" का बोर्ड लगा था, लेकिन जब पुलिस ने पीछा कर गाड़ी को पकड़ा तो अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। स्कॉर्पियो से 800 ग्राम स्मैक बरामद हुई, जिसकी कीमत 10 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। इस कार्रवाई में पुलिस ने दो कथित तस्करों को गिरफ्तार किया है, जबकि उनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
सदर एसडीपीओ-1 अभिनव पाराशर ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि नशीले पदार्थ की बड़ी खेप शहर से होकर गुजरने वाली है। सूचना के बाद वाहन जांच अभियान शुरू किया गया। इसी दौरान एक संदिग्ध स्कॉर्पियो को रोकने का इशारा किया गया, लेकिन चालक ने गाड़ी रोकने के बजाय स्पीड बढ़ा दी और सर्विस रोड की ओर भागने लगा।
पुलिस ने पीछा कर गाड़ी को घेर लिया। गाड़ी रुकते ही उसमें सवार दो लोग भागने की कोशिश करने लगे, लेकिन जवानों ने दोनों को दबोच लिया।

तलाशी में खुला बड़ा राज
जब स्कॉर्पियो की तलाशी ली गई तो उसमें से 100-100 ग्राम के 8 पैकेट, यानी कुल 800 ग्राम स्मैक बरामद हुई। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिलवर यादव और रंजीत यादव के रूप में हुई।

सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने गाड़ी पर लगे "सिविल सर्जन, मधेपुरा" बोर्ड की जांच की। संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने पर पता चला कि इस नंबर की कोई सरकारी गाड़ी उनके यहां नहीं है। इससे साफ हो गया कि तस्करों ने पुलिस और लोगों को भ्रमित करने के लिए सरकारी बोर्ड का सहारा लिया था।

*कालियागंज से लाई जा रही थी खेप*

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पश्चिम बंगाल के कालियागंज से स्मैक लेकर आ रहे थे। पुलिस के अनुसार बरामद स्मैक की कीमत 10 लाख रुपये से अधिक है। अब पुलिस मोबाइल फोन और कॉल डिटेल्स खंगालकर यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
पुलिस को इस गिरोह के एक अन्य सदस्य के बारे में भी जानकारी मिली है, जो मौके से फरार होने में सफल रहा। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।

नशे के तस्करों का नया फॉर्मूला
शराबबंदी के बाद बिहार में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। कभी एंबुलेंस, कभी प्रेस और अब सरकारी अधिकारी का बोर्ड लगाकर तस्करी की कोशिश। पूर्णिया में पकड़ी गई यह स्कॉर्पियो बताती है कि तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए किस हद तक जाने को तैयार हैं। लेकिन इस बार उनका पूरा खेल पुलिस ने सड़क पर ही खत्म कर दिया।

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