कोढ़ा प्रखंड के विभिन्न कालाजार प्रभावित राजस्व ग्रामों के टोलो में कालाजार उन्मूलन की दिशा में अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। वर्ष 2024 के बाद जिले में कालाजार का एक भी नया मरीज सामने नहीं आया है, जिससे कटिहार स्वास्थ्य विभाग कालाजार उन्मूलन के लक्ष्य को लगभग पूरा कर लिया है । हालांकि, पूरी तरह से बीमारी को खत्म करने के लिए सतर्कता में कोई कमी नहीं बरती जा रही है।
इसी क्रम में पीरामल के अभिमन्यु कुमार व भीबीडीएस अमरनाथ सिंह व अन्य स्वास्थ्य विभाग की टीम ने प्रखंड के विनोदपुर पंचायत के मुंडा टोला,रामाखाल , के अलावे चंदवा , के कालीघाट, व अन्य टोले में पूर्व में मिले मरीजों का घर-घर जाकर फॉलो-अप किया। वीडीसीओ नंदकिशोर मिश्र के नेतृत्व में टीम ने 15 से अधिक मरीजों के घर पहुंचकर उनकी वर्तमान स्थिति की जांच की और परिजनों से विस्तार से बातचीत की।
स्वास्थ्य टीम ने लोगों को कालाजार के प्रमुख लक्षणों—दो सप्ताह से अधिक बुखार, वजन घटना, भूख में कमी, कमजोरी, तिल्ली और जिगर का बढ़ना तथा शरीर पर काले धब्बे—के बारे में जागरूक किया। साथ ही सलाह दी कि ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत आशा कार्यकर्ता या नजदीकी सरकारी अस्पताल से संपर्क करें।
फॉलो-अप के दौरान सभी मरीज स्वस्थ पाए गए, जो जिले के लिए राहत की खबर है। स्वास्थ्य विभाग ने यह भी दोहराया कि कालाजार का इलाज सरकारी अस्पतालों में पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी कटिहार ने बताया कि कालाजार को जड़ से खत्म करने में जनसहभागिता बेहद जरूरी है। उन्होंने चेताया कि ठीक हो चुके मरीज भी दोबारा इसकी चपेट में आ सकते हैं। ऐसे मामलों में त्वचा संबंधी लीश्मेनियेसिस (पीकेडीएल) होने की आशंका रहती है, जिसका इलाज संभव है, लेकिन इसके लिए करीब 12 सप्ताह तक नियमित दवा लेनी होती है।
स्वास्थ्य विभाग की इस सक्रियता से साफ है कि कटिहार जिला जल्द ही कालाजार मुक्त जिला बनने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
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