पूर्णिया शहर का हाल इन दिनों किसी डूबे हुए गांव से कम नहीं दिख रहा। चारों तरफ पानी, गलियों में कीचड़ और बीच-बीच में मेढ़कों की टर-टर… लेकिन यह कोई तालाब या नदी किनारा नहीं, बल्कि पूर्णिया नगर निगम के वार्ड 32 मिर्जापुर नया टोला की तस्वीर है। हालत ऐसी है कि कई घर पानी में तैरते नजर आ रहे हैं और लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि अभी मानसून की असली बारिश शुरू भी नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम में जहां सड़क, नाला और ड्रेनेज जैसी बुनियादी योजनाओं पर काम होना चाहिए, वहां स्वागत द्वार बनाने के प्रस्ताव पास किए जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि “जब अंधेरी नगरी और चौपट राजा होंगे, तो शहर का बेड़ा गर्क होना तय है।”
वार्ड 32 के मिर्जापुर नया टोला में हल्की बारिश होते ही पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है। यहां न पक्की सड़क है, न नाला और न ही जल निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था। गलियों में जमा पानी से लोगों का चलना दूभर हो गया है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, जबकि मरीजों और महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार वार्ड पार्षद और मेयर का ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। लोगों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता वोट मांगने जरूर आते हैं, लेकिन जीतने के बाद इलाके की सुध लेने वाला कोई नहीं रहता। अब यहां के लोग खुद को सिर्फ “वोटर” बनकर रह जाने को मजबूर मान रहे हैं।
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