बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद आज बांग्लादेश में चुनाव होने वाले हैं। इस चुनावों पर भारत, अमेरिका और चीन से लेकर पाकिस्तान तक की नजर बनी हुई है। भारत के इस पड़ोसी मुल्क में प्रधानमंत्री शेख हसीना के हटने के बाद से धार्मिक हिंसा में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे लेकर कई संगठनों ने आंकड़े भी जारी किए हैं। दूसरी तरफ इन चुनावों की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसकी वजह यह है कि इन चुनाव में मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने सबसे बड़ी पार्टी- आवामी लीग को ही प्रतिबंधित करवा दिया। इसके अलावा राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएं सामने आ रही हैं, जो कि निष्पक्ष चुनाव के दावों पर भी प्रश्न चिह्न लगा रही हैं।
बांग्लादेश के निर्वाचन आयोग के मुताबिक, मतदान के दिन सुबह 7:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक का समय तय किया गया है। पिछले चुनावों की तुलना में इस बार मतदान का समय एक घंटा बढ़ाया गया है, क्योंकि मतदाताओं को संसदीय सीटों के साथ-साथ एक संवैधानिक जनमत संग्रह (जुलाई चार्टर) के लिए भी वोट डालना होगा, जिसके जरिए अंतरिम सरकार संविधान में बड़े बदलाव कराने की तैयारी में है।
इस चुनाव में कुल 59 पंजीकृत राजनीतिक दल हिस्सा ले रहे हैं। प्रमुख दलों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाला 10 पार्टी वाला गठबंधन और नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाला 11 दलों वाला गठबंधन शामिल है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया है। इसके अलावा जातीय पार्टी के दोनों धड़े- जातीय पार्टी (इरशाद), जातीय पार्टी (कादर) और वामपंथी पार्टी- लेफ्ट डेमोक्रेटिक अलायंस और अमार बांग्लादेश पार्टी भी मैदान में हैं।
चुनावी मैदान में कुल 1,981 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इनमें करीब 1700 उम्मीदवार राजनीतिक दलों से हैं और 249 निर्दलीय हैं। महिलाओं की भागीदारी कम है। 63 महिला उम्मीदवारों को राजनीतिक दलों से मौका दिया गया है, जबकि करीब 13 महिला उम्मीदवार निर्दलीय हैं। यानी कुल संख्या 76 है।
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