अररिया/सिटी हलचल न्यूज
सीमांचल में ब्राह्मण समाज की उपेक्षा ने राजनीतिक हलचल का माहौल बना दिया है। अररिया जिले के ब्राह्मण नेता सरयु मिश्रा, श्रीदेव झा, बालकृष्ण झा, मयानंद ठाकुर लंबे समय से विधायक बनकर समाज का सशक्त प्रतिनिधित्व करते आए हैं।अब नए परिसीमन के बाद नरपतगंज और फारबिसगंज विधानसभा की सीटों पर भाजपा और एनडीए को बड़ी रणनीति के साथ चुनाव लड़ना है। इसी बीच भाजपा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अजय झा ने चेतावनी दी कि अगर उन्हें भाजपा का टिकट नहीं मिला, तो वे अररिया भाजपा कार्यालय में आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगे।अजय झा ने बताया कि वे 2005 से भाजपा में पूरी तरह सक्रिय हैं और एनडीए प्रत्याशियों को जीत दिलाने के लिए तन-मन और धन सभी कुछ समर्पित किया है
उन्हें 2009 में मौका मिला था, लेकिन उस सीट से जीत संभव नहीं थी। 2020 के विधानसभा चुनाव में फारबिसगंज के द्विजदेनी मैदान में भी स्व. सुशील मोदी ने उन्हें अवसर देने का आश्वासन दिया था, लेकिन न तो उन्हें विधानसभा का टिकट मिला और न ही विधान परिषद में लाया गया।अजय झा ने कहा, “मुझे प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप जयसवाल और अन्य प्रदेश स्तरीय नेतृत्व द्वारा कई बार आश्वासन मिला कि मेरे बारे में सोचा जाएगा। लेकिन अब अगर मुझे टिकट नहीं दिया गया, तो मेरे पास चुनाव लड़ने का विकल्प नहीं बचता। मैं पहले ही नरपतगंज विधानसभा से चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुका हूँ
यदि भाजपा मुझे टिकट नहीं देती तो जिम्मेदारी पूरी तरह पार्टी नेतृत्व की होगी।”इस बयान के बाद अररिया और सीमांचल में भाजपा की रणनीति और टिकट वितरण को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।अजय झा का यह सशक्त और वायरल बयान भाजपा के लिए राजनीतिक चेतावनी है। सीमांचल में ब्राह्मण समाज की भावनाओं को संतुलित करना और टिकट वितरण में न्याय सुनिश्चित करना अब पार्टी के लिए प्राथमिकता बन गया है।अगर संतुलन नहीं बना, तो आगामी चुनावों में भाजपा की स्थिति पर गहरा असर पड़ सकता है।



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