अमौर/सनोज
पूर्णियाँ: ज़िले के बायसी अनुमंडल सीमांचल का अमौर विधानसभा इलाका बहुत ही पिछड़ापन इलाका है, जो अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिले में कई बार लोकसभा विधानसभा चुनाव हो गए। कितने सांसद विधायक चुने गए। लेकिन अमौर विधानसभा में पुल, पुलिया ,सड़कों का घोर अभाव आज तक है। प्रखंण्ड में कई ऐसे पूल है जो अर्धनिर्मित है। कई गांव में पक्की सड़कों का निर्माण नहीं हुआ है। जिस कारण लोग शुगम यातायात से वंचित हो रहे हैं। यह क्षेत्र सड़क पुल -पुलिया के अभाव में पूरी तरह से पिछड़ेपन का शिकार है। यह इलाका पूरी तरह से आर्थिक दृष्टिकोण से भी बहुत ही निम्न स्तर का है। जी हां हम बात कर रहे हैं अमौर विधानसभा क्षेत्र का मुख्य रूप से खारी पुल का निर्माण एक दशक से अधिक अवधि गुजरने के बाद भी पूर्ण नहीं हुआ है जानकारों की माने तो पुल निर्माण कार्य हेतु शिलान्यास पूर्व विधायक सबा जफर आलम ने किया था जहां उनके कार्यकाल के बाद अब्दुल जलील मस्तान काँग्रेस से चुनाव
जीतकर विधायक बने। अभी वर्तमान में एआईएमआईएम के विधायक सह प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान है, फिर भी पुल का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। पुल निर्माण को लेकर कई मर्तबा धरना प्रदर्शन हुआ , लेकिन अब तक पुल निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं देखी जा रही है। लोगों की जुबान में बस एक ही बात है यह पुल एक दशक में नहीं बन पाया तो क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि आने वाले 2 साल के अंदर यह पुल बन पाएगा? वही फिलहाल कनकई नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद लोगों को बड़ी कठिनाइयों के साथ नाव पर आवाजाही करना पड़ रहा है
बाइक सवार हो या पैदल सवार 2 घंटे इंतजार करने के बाद नाव पर जा पाते हैं। आपको बता दें कि पुल का एप्रोच का कार्य अधूरा होने के कारण यह स्थिति बनी हुई है 2 प्रखंडों बैसा और अमौर के तकरीबन 12 पंचायतों के लोगों की जिंदगी नाव पर टिकी हुई है। वही बात की जाए तो बाढ़ के दिनों में नाव का परिचालन भी बंद हो जाता है जिसे लेकर 50 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटकर बैसा प्रखंड होते हुए कनकई नदी के उस पार सिरसी हफनियां कनफलियां व अन्य पंचायत आना जाना होता है।



Post a Comment