पूर्णियाँ/सिटिहलचल न्यूज़
बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सह राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफ़ेसर आलोक कुमार ने बयान जारी कर कहा कि देश के प्रमुख विपक्षी दलों के द्वारा पाटलिपुत्रा की धरती से माननीय नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार को 2024 में देश की गद्दी से उतार कर संविधान एवं लोकतंत्र को बचाने का आह्वान से संघ परिवार एवं भाजपा के लोग सदमे में आ गए हैं। भाजपा नेताओं के अनर्गल बयान से विपक्षी एकता पर कोई असर पड़ने वाला नहीं है। प्रोफ़ेसर आलोक ने कहा कि अब देश के लोग झाँसे में आने वाले नहीं हैं
, ख़ासकर पिछड़े वर्ग अनुसूचित जाति- जनजाति एवं अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भाजपा को सबक़ सिखाने के लिए लोक सभा चुनाव का इंतज़ार कर रहे हैं। वर्ष 2014 में भाजपा एवं आर॰ एस॰ एस॰ नरेंद्र मोदी जी को पिछड़ा प्रधानमंत्री के रूप में आगे लाकर बहुसंख्यक पिछड़े वर्ग का वोट लेकर सत्ता में आयी। पिछड़े वर्ग के संवैधानिक अधिकारों को संविधान संशोधन कर सामाजिक एवं शैक्षणिक आरक्षण को समाप्त कर दिया। पुनः वर्ष 2019 में पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा ओबीसी की जाति आधारित गिनती का घोषणा कर सत्ता में आने के बाद जाति जनगणना से मुकर गई। सरकारी क्षेत्रों को निजी क्षेत्रों में बदलकर कर एससी -एसटी- ओबीसी के आरक्षण को निष्प्रभावी बना दिया गया है। आदिवासी बाहुल्य राज्यों के जल -जंगल -ज़मीन को बड़ी कम्पनियों के हवाले कर इन वर्गों को नक्सली, उग्रवादी बताकर केन्द्रीय बलों के द्वारा नरसंहार किया जा रहा है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के मणिपुर राज्य में हज़ारों आदिवासी को बेघर कर हिंसा की आग में झोंका जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रतिदिन देश के गौरवशाली इतिहास को बदल कर आरएसएस के फ़ासिस्ट विचारधारा को शिक्षण संस्थानों में डाला जा रहा है। प्रोफ़ेसर आलोक ने कहा कि पाटलिपुत्रा की धरती से देश के गरीबों, पिछड़ों , दलितों एवं अल्पसंख्यकों के सबसे बड़े रहनुमा माननीय लालू प्रसाद यादव के दिशा निर्देश एवं बिहार के मुख्यमंत्री माननीय नीतीश कुमार जो देश में विकास पुरूष एवं पिछड़ों ,दलितों एवं महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में सशक्त करने का काम किया के नेतृत्व में देश के सभी सेकुलर एवं लोकतंत्र में आस्था रखने वाले नेता देश कि सत्ता से भाजपा को हटाने का संकल्प लिया है।
इस अभियान में एक तरफ़ राहुल गांधी , शरद पवार, ममता बनर्जी, उद्धव ठाकरे , जैसे अनुभवी नेता हैं वहीं वामपंथी दलों के साथ -साथ स्टालिन, अखिलेश यादव, हेमंत सोरेन, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती एवं उमर अब्दुल्ला के पाटलिपुत्र की धरती पर क़दम रखना देश की एकता एवं अखंडता के साथ साथ गंगा -जमुनी संस्कृति को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।



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