पूर्णियां/बालमुकुन्द यादव
पूर्णियां:बहुजन क्रांति मोर्चा के प्रमंडलीय प्रभारी सह राजद के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर आलोक कुमार ने बयान जारी कर पटना उच्च न्यायालय के द्वारा बिहार सरकार द्वारा कराए जा रहे जाति आधारित जनगणना के रोक पर खेद प्रकट किया है। प्रोफेसर आलोक ने कहां की बिना आंकड़े के देश में ओबीसी वर्ग के लोगों को 27% आरक्षण मंडल कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर किया गया। वर्ष 1931 के जनगणना के आधार पर देश में ओबीसी की जनसंख्या 52% बताई गई है। वर्तमान में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के पास आजादी के बाद से किसी भी तरह का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति के आंकड़े राष्ट्रीय स्तर पर कराए जा रहे जनगणना के साथ जुटाए जाते रहे हैं
फल स्वरूप इन वर्गों को 22.5 प्रतिशत आरक्षण सरकारी सेवाओं एवं राजनीति क्षेत्रों में मिल रहा है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा जनगणना नहीं कराए जाने के बाद बिहार सरकार इस कार्य को सर्वदलीय सर्व सम्मत निर्णय के आधार पर जातीय आधारित गिनती आरंभ किया। भाजपा के कुछ खडयंत्रकारी लोगों द्वारा मामले को न्यायालय में ले जाकर टालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रोफेसर आलोक ने कहा कि केंद्रीय सेवाओं एवं न्यायिक सेवाओं में आज भी ओबीसी समाज के लोगों का प्रतिनिधित्व नगण्य है, जिसकी आबादी आज भी लगभग 60% आंकी गई है। भाजपा एवं संघ के लोग पिछड़ों के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने के लिए बराबर धार्मिक मुद्दे अंधविश्वास पाखंड को बढ़ावा देने का काम करती आ रही है
प्रोफेसर आलोक ने केंद्र सरकार से जाति आधारित ओबीसी की गणना कराने की मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार से 48 घंटे में 10% सवर्ण आरक्षण संविधान बदल कर बिना किसी आयोग की रिपोर्ट के लागू किया गया उसी आधार पर आने वाले जनगणना में ओबीसी की गिनती करा कर जनसंख्या के आधार पर सभी सरकारी संस्थानों में आरक्षण सुनिश्चित करें। पिछड़ा प्रधानमंत्री का ढिंढोरा पीट कर वोट लेने के बाद भाजपा पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। भाजपा के नेता बराबर बता रहे हैं जाति आधारित गिनती भारत सरकार का मामला है।
फल स्वरूप इन वर्गों को 22.5 प्रतिशत आरक्षण सरकारी सेवाओं एवं राजनीति क्षेत्रों में मिल रहा है। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा जनगणना नहीं कराए जाने के बाद बिहार सरकार इस कार्य को सर्वदलीय सर्व सम्मत निर्णय के आधार पर जातीय आधारित गिनती आरंभ किया। भाजपा के कुछ खडयंत्रकारी लोगों द्वारा मामले को न्यायालय में ले जाकर टालने का प्रयास किया जा रहा है। प्रोफेसर आलोक ने कहा कि केंद्रीय सेवाओं एवं न्यायिक सेवाओं में आज भी ओबीसी समाज के लोगों का प्रतिनिधित्व नगण्य है, जिसकी आबादी आज भी लगभग 60% आंकी गई है। भाजपा एवं संघ के लोग पिछड़ों के संवैधानिक अधिकार को समाप्त करने के लिए बराबर धार्मिक मुद्दे अंधविश्वास पाखंड को बढ़ावा देने का काम करती आ रही है
प्रोफेसर आलोक ने केंद्र सरकार से जाति आधारित ओबीसी की गणना कराने की मांग करते हुए कहा कि जिस प्रकार से 48 घंटे में 10% सवर्ण आरक्षण संविधान बदल कर बिना किसी आयोग की रिपोर्ट के लागू किया गया उसी आधार पर आने वाले जनगणना में ओबीसी की गिनती करा कर जनसंख्या के आधार पर सभी सरकारी संस्थानों में आरक्षण सुनिश्चित करें। पिछड़ा प्रधानमंत्री का ढिंढोरा पीट कर वोट लेने के बाद भाजपा पिछड़ों के संवैधानिक अधिकारों का हनन कर रही है। भाजपा के नेता बराबर बता रहे हैं जाति आधारित गिनती भारत सरकार का मामला है।



Post a Comment