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आचार्य एवं अध्यक्ष महर्षि संत गुरुशरण परमहंस जी महाराज के निधन पर, संत समाज में शोक की लहर



कोढ़ा /शंभु कुमार 


संत सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज की अंतरंग परम प्रिय कनिष्ठ शिष्य अखिल विश्व संतमत सत्संग ज्ञान महायज्ञ के वर्तमान आचार्य एवं अध्यक्ष महर्षि संत गुरुशरण परमहंस जी महाराज का अपने जन्म भूमि कटिहार जिला अंतर्गत कोढ़ा प्रखंड के विषहरिया गांव में अपने पार्थिव शरीर को परित्याग कर ब्रह्मलीन हो गए। बताया जाता है कि बाबा का भतीजा रवि कुमार बाबा से ही दीक्षित थे। पूज्य बाबा के शरीर परित्याग की बात सुबह होते ही चारों तरफ फैल गई।


सभी क्षेत्र के श्रद्धालु एवं भक्तगण बाबा के शरीर परित्याग की बात सुनते ही उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन हेतु हजारों की संख्या में उमड़ पड़े। महासभा के भी सभी सदस्य गण एवं वरिष्ठ नागरिक इस समय उपस्थित हुए। पूज्य बाबा के पार्थिव शरीर को ब्रह्मचारियों द्वारा गांव के चारों ओर गाजे-बाजे के साथ परिभ्रमण कराया गया जिसमें सभी धर्म के लोग सम्मिलित हुए। परिभ्रमण के बाद महासभा एवं ग्रामीण संतमत के विचारानुसार पांच ब्रह्मचारी एवं रवि कुमार जो कि बाबा का भतीजा है ने आरती द्वारा बाबा के पार्थिव शरीर को अग्नि प्रज्वलित की। अग्नि प्रज्वलित होते ही धुआं आकाश में गूंज उठा अंतिम संस्कार तक सभी भक्तजन एवं चारों दिशाओं से आने वाले संत एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। अंतिम संस्कार के दूसरे दिन सभी ग्रामीणों के द्वारा एक बैठक की गई जिसमें ध्यान यज्ञ चलाने हेतु पूज्य नंदकिशोर बाबा एवं रवि कुमार के द्वारा अस्थि कलश कुप्पाघाट महर्षि मेंही आश्रम में भ्रमण कराया गया। दोनों मिलकर अस्थि कलश को गंगा लाभ कराए ग्रामीणों के द्वारा यह भी निर्णय लिया गया कि पूज्य बाबा का अंतिम कार्यक्रम सत्संग ध्यान एवं होम के द्वारा संपन्न किया जाएगा। इस अवसर पर कृष्णदेव, दास रामेश्वर दास, अनिल दास,मनोज दास, गोपाल शर्मा, राजू शर्मा, अजय कुमार भारती, भोला प्रसाद यादव, एवं समस्त संतमत समाज उपस्थित रहे।

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