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एनपीके के नाम पर मिट्टी बेच बन गए करोड़पति खाद माफिया

 


पूर्णियां से बालमुकुन्द यादव की रिपोर्ट

पूर्णिया सहित सीमंचल में डीएपी के लिए हाहाकार है। वही डीएपी के साथ दुकानदारो नकली एनपीके टैग कर दिया जा रहा है। जिसके बाद खुदरा उर्बरक दुकानदारो ने डीएपी का उठाव करना भी बंद कर दिया है। वही नकली एनपीके बेचकर इस साल भी थोक विक्रेता लखपति से करोड़पति बन गए है


ऐसा ही नकली एनपीके की खेप गुलाबबाग के थोक विक्रेता बिश्वनाथ अग्रवाल द्वारा बेचे जाने के बाद कृषि विभाग ने जब्त कर नमूना जाँच हेतु भेजा है। जलालगढ़ के जितेंद्र खाद बीज दुकान के द्वारा गुलाबबाग के बिश्वनाथ अग्रवाल से डीएपी की खरीदारी की थी, जिसके बाद उक्त दुकानदार को जबरदस्ती किसान ज्योति ब्रांड का एनपीके दे दिया गया। जिसमें निर्माण तिथि वैधता कुछ भी नहीं था। शिकायत के बाद जिला की टीम ने उक्त एनपीके को जब्त कर नमूना जाँच हेतु भेज दिया है


वहीं थोक बिक्रेताओं द्वारा दोहन शोषण से नाराज जलालगढ़ के थोक बिक्रेताओं ने सामूहिक रूप से प्रखंड कृषि पदाधिकारी को संयुक्त आवेदन देकर आंदोलन का आगाज कर दिया है। बिक्रेताओं का कहना है की एक तो उर्बरक सही मूल्य पर नहीं मिलता है ऊपर से अन्य सामग्री टैग कर दिया जाता है जिसका मूल्य काफी अधिक होता है


मालूम हो कि जिले में नकली एनपीके का खेल वर्षो से चल रहा है। जिसे आप असान भाषा मे मिट्टी कह सकते है। इसी मिट्टी को जबरदस्ती दुकानदारो को सोने के भाव मे बेचने का दबाब बनाया जाता है। ऐसा नही है कि कृषि विभाग को इसकी जानकारी नहीं है। सब जानकारी होते हुए भी उनके हाथ बँधे है क्योंकि इन थोक बिक्रेताओं के ऊपर सफेदपोशों का हाथ है। वहीं जब से दुकानदारो ने इन थोक बिक्रेताओं ने इन माफियाओं की शिकायत की है तब से इन लोगों को उर्बरक नहीं दिया जा रहा है, उल्टे बर्बाद करने की धमकी दी जा रही है।

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