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उर्बरक बेच कर वापस लेने का खेल हर वर्ष होता है विभाग का मनता है हैप्पी न्यू इयर

पूर्णियां से बालमुकुन्द यादव की रिपोर्ट

पूर्णियाँ में उर्बरक के लिए हाहाकार है मगर गुलाबबाग के थोक बिक्रेताओं द्वारा एक अलग ही खेल खेला जा रहा है, यह खेल कृषि विभाग पूर्णिया की मिलीभगत से वर्षो से अंजाम दिया जा रहा है। कृषि निदेशक पटना ने विभाग को एक पत्र जारी किया है जिसमे पूर्णिया के 2 बड़े होलसेल दुकान विश्वनाथ अग्रवाल और किसान बीज भंडार का लिस्ट जारी किया है जिसमें दोनो दुकान को जिले के छोटे छोटे दुकानो के नाम से उर्बरक अलॉट कर देने को कहा था, मगर दोनो दुकान द्वारा रिटेल दुकान को उर्बरक नहीं दिया गया और फिर इनके पास ही वापस आ गया।विभाग ने पाया कि दोनों दुकानों द्वारा उर्बरक बेचने के बाद फिर दुबारा उनसे वापस ले ली गई, ऐसा एकबार नहीं बल्कि बार बार किया जा रहा है, जबकि जिले में उर्बरक की भारी किल्लत है। विभाग ने कृषि पदाधिकारी को इस बाबत पत्र लिखा है और जाँच कर गलत पाए जाने पर इनका लाइसेंस रद्द कर एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिये गए है


अब आइए मुद्दे की बात पर, विश्वनाथ अग्रवाल और किसान खाद बीज भंडार द्वारा किये गए इस कारनामे को कृषि विभाग पूर्णियाँ, सभी थोक बिक्रेता और रिटेलर अच्छी तरह जान रहे है की दोनो थोक बिक्रेताओं द्वारा ऐसा क्यों किया गया है। दरअसल उर्बरक लेने के लिए रिटेल दुकानदार क उक्त कंपनी का प्रिंसिपल सर्टिफिकेट जमा करना होता है। यह सर्टिफिकेट 3 4 थोक बिक्रेताओं के पास रहता है, रिटेल दुकानदार इनके पास से ही उर्बरक उठाना मजबूरी है। वही जब यह दुकानदार विश्वनाथ अग्रवाल और किसान खाद बीज भंडार उर्बरक लेने जाते है तो उर्बरक के साथ अन्य प्रोडक्ट लेने के लिए दबाब बनाते है, जिसे लेने के लिए रिटेल दुकानदार मना करता है तो उसे उर्बरक नहीं दिया जाता हैं। यही उर्बरक इनके पास वापस आ गया जिसकी जाँच हो रही है। दूसरा यह है कि रिटेल दुकानदार इन दोनों के पास से उर्बरक नहीं उठाते है मगर विभाग ने थोक बिक्रेताओं के पास उर्बरक की उपलब्धता देखते हुए दोनों थोक दुकानदार के पास उर्बरक लेने भेज देते है। वहीं अपना ग्राहक न देखकर दोनो दुकानदार ने ज्यादा दाम का डिमांड कर देते है, या अन्य उत्पाद लेने का दबाब बनाते है,ऐसी स्थिति में रिटेल दुकानदार उर्बरक लेने से मना कर देता है, और यहीं उर्बरक दोनो थोक बिक्रेताओं के पास वापस आ गया हैं।पूर्णिया में वर्षो से चल रहे इस खेल को अब आम जनता भी समझने लगा है, तो फिर कृषि विभाग पत्र लिखकर इस तरह की नौटंकी क्यों कर रहा है, यह इस सब समझ रहा है


जबकि जलालगढ़ के सभी थोक बिक्रेताओं ने अन्य उत्पाद और टैग करके देने की शिकायत लिखित रूप से पहले ही कर चुका है। वहीं रिटेल दुकानदारो के पास दूसरी मजबूरी यह है कि वे किसी दुकान का नाम लेकर शिकायत नहीं कर सकते है, अगर ये दुकानदार शिकायत करेंगे तो कोई भी थोक विक्रेता इन्हें माल नहीं देगा और मजबूरन इन्हें दुकान बंद करना होगा। इसलिए ऊँचे दाम में थोक विक्रेता माल देता है तो रिटेल दुकानदार के पास मजबूरी है ऊँचे दाम पर माल बेचना, फिर इसके बाद विभाग दोनो से माल खाता है, इसी चक्कर मे पूर्व कृषि पदाधिकारी शंकर झा को जेल में रहना पड़ा था


अब आते है कृषि निदेशक द्वारा लिखित जाँच पत्र का तो विश्वनाथ अग्रवाल और किसान खाद बीज भंडार ने ऐसा ऐसा जाँच बहुत झेला है। सूत्र बताते है कि ऊपर से नीचे तक दोनों का सफेदपोशो के यहाँ चैनेल बना हुआ है। जाँच अधिकारी को मीठा चाय पिलाकर दोनो थोक बिक्रेता कह दे देंगे कि रिटेल दुकानदार उर्बरक लेने आये ही नहीं तो कहा दे दे? इसके अलावे रिटेल बिक्रेताओं से सादे कागज पर पहले ही लिखवा लेते है कि कोई भी उत्पाद उर्बरक के साथ टैग करके नहीं दिया गया है। अगर सही से दुकान का सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड निकलवाया जाय तो पता लगेगा, कितनी बार रिटेल दुकानदार उर्बरक लेने के लिए फोन किये है और कितने बार दोनो के दुकान में आकर उर्बरक के लिए गिड़गिड़ाए है।कुल मिलाकर पूरी जाँच ढाक के तीन पात निकलेगा। अगर अधिकारी चाह ले तो दोनों का लाइसेंस भी रद्द होगा और दोनों पर एफआईआर भी दर्ज होगा।

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