Nalanda
अंतर्राष्ट्रीय बाल श्रम निषेध दिवस(12 जून )के मौके पर जाने-माने समाजसेवी तथा सद्भावना मंच (भारत )के संस्थापक दीपक कुमार ने कहा कि बच्चे किसी देश के भविष्य होते हैं लेकिन भूख से बिलबिलाते, गरीबी की मार झेलते और बाल दासता की जंजीरों से जकड़ा यह बचपन किसी देश का भविष्य कैसे हो सकता है ?बाल श्रम बच्चों को मानसिक, शारीरिक, सामाजिक और नैतिक रूप से नुकसान पहुंचाता है। बच्चों से मासूम बचपन छीन कर जिम्मेदारियों का बोझ डालकर उनका सुनहरा भविष्य अंधकारमय किया जाता है ।इस मौके पर समाजसेवी दीपक कुमार ने कहा कि सरकार व समाज के समुचित प्रयास से ही बाल श्रम मुक्त समाज का निर्माण किया जा सकता है
अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन का अनुमान है कि 152 मिलियन बच्चे बाल श्रम में लगे हुए हैं। दुनिया के हर 10 बच्चों में एक बच्चा भारत का है। बच्चों के संरक्षण एवं विकास के लिए कई कानून बने हुए हैं। जिसमें बाल श्रम संशोधन( निषेध और विनियमन )अधिनियम- 2016 में 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को किसी भी प्रकार काम नहीं करने का वर्णन है।उनके सुरक्षा के लिए कारखाना अधिनियम- 1948 ,खान अधिनियम- 1952 ,बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986, बच्चों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009, बच्चों के देख रेख एवं संरक्षण अधिनियम- 2015 आदि बने है। बच्चो के साथ यदि किसी भी प्रकार का शोषण हो तो चाइल्ड लाइन - 1098 पर संपर्क कर सकते है
बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई संस्थाएं बने हुए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, और राज्य स्तर पर राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग बने हुए है ।जिला स्तर पर बाल कल्याण समिति और विधि विवादित किशोर के लिए किशोर न्याय अधिनियम , बच्चो के देखरेख एवम् संरक्षण अधिनियम आदि है ।हम सभी को बाल हितैषी समाज बनाने की जरूरत है जहा बच्चो के साथ किसी प्रकार का भेदभाव एवम् शोषण ना हो । बच्चो के लिए जीवन जीने का अधिकार ,सुरक्षा का अधिकार , विकास एवम् सहभागिता का अधिकार है।
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