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कोरोना का द्वितीय संघात आधी दुनिया का आसमाँ विषय पर राष्ट्रीय वेबीनार

Gaya
गया से आशीष कुमार गुप्ता की रिपोर्ट
बोधगया। कोरोना काल ने सभी लोगों के कार्य और व्यवहार में परिवर्तन लाया है। इससे नारी शक्ति अछूता नहीं है। इस महामारी में कुछ बाध्यता सबके सामने आई है। एक दूसरे को समझने का और सामंजस्य बिठाने का अवसर दिया है। स्त्री पुरुष को एक नए सिरे से परिभाषित करने का अवसर प्रदान किया है। उक्त बातें मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो राजेंद्र प्रसाद ने शुक्रवार कोरोना का द्वितीय संघात और आधी दुनिया का आसमा विषय पर आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार में अपने अध्यक्षीय संबोधन में कही। गृहविज्ञान विभाग एवं जनसंचार समूह क़े संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस वेब गोष्ठी में उन्होंने कहा कि शिक्षा ने नारी को सर्वगुण और सबल बनाया है। 21वीं सदी में बहुत सारा परिवर्तन आ रहा है। विकृति के साथ चेतना भी आ रही है। आज संयुक्त परिवारों के महत्व को लोग समझने लगे हैं। नए प्रकार के समाजिकी का सृजन हुआ है। कोरोना महामारी ने स्त्री और पुरुष दोनों को संवेदनशील बनाया है। प्रो प्रसाद ने इस बात को स्पष्ट किया कि स्त्री अब केवल उपभोग की वस्तु नहीं है। वह इस चक्रव्यूह को तोड़कर आगे निकल गई है
 मुख्य वक्ता महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के स्त्री अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ सुप्रिया पाठक ने कहा कि कोरोना काल में लोगों ने घरों को एक नई दृष्टि से देखा। शुरुआती दिनों में काफी रोमांचक थी। लॉकडाउन पीरियड में महिलाओं की स्थिति क्या थी। उन्होंने साबित किया कि उनके ही दम पर घर भी है और बाहर भी। महिलाएं जीवन भर और अलिखित तथा अघोषित लॉक डाउन का शिकार होती है। पुरुषों ने भी कोरोना का में इसे महसूस किया। 
विशिष्ट वक्ता अंग्रेजी विभाग के आचार्य व विदेशी भाषा विभाग के निदेशक प्रो एम एन अंजुम ने कहा कि हम अपने जीवन में कभी हार नहीं माने और चलते जाएं। यह शब्द उन महिलाओं के प्रति समर्पित है जिन्होंने कोरोना के संघात को झेला है।विशिष्ट वक्ता सीनियर टीवी एंकर व नई दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार सुश्री  स्मिता शर्मा ने कहीं कि अगर बेटी नहीं बचाओगे तो घर की रोटी कैसे खाएंगे घर की प्राथमिक जिम्मेवारी महिलाओं पर ही है उन्होंने इंडिया और भारत के बीच के अंतर के साथ महिलाओं की स्थिति की विस्तार से चर्चा की
 विशिष्ट वक्ता द हिंदू नेशनल ब्यूरो नई दिल्ली कि वरिष्ठ पत्रकार व डिप्टी एडिटर सुश्री विजेता  ने कहां  कि कोरोना काल में सबसे ज्यादा आर्थिक तबाही हुई है। २३ करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए हैं। मानसिक तौर पर भी महिलाओं पर बहुत असर पड़ा है। 
विशिष्ट वक्ता प्रो राजेंद्र सिंह विश्वविद्यालय प्रयागराज हिंदी विभाग के सहायक आचार्य डॉ अलका मिश्र ने कही कि बाहर शक्तिशाली देवियां तो है लेकिन घर में स्त्रियां शक्तिहीन है कोरोना काल में स्त्रियों का काम बढ़ गया है। यह दुखद है कि सामाजिक परिदृश्य में आज भी नारी को हीनता के भावों से देखा जाता है। आधार वक्तव्य देते हुए विभागाध्यक्ष गृहविज्ञान प्रो किशोर कुमार ने कहा कि जब सारी दुनिया घर में सिमटी हो तो घर की नारियों पर सबो की जिम्मेवारी बढ़ गई थी। वैसे समय में वह आधी दुनिया ही नहीं, पूरी दुनिया का दायित्व निर्वहन कर रही थी
 कार्यक्रम का संचालन करते हुए समन्वयक डॉ शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा कि इन वेव गोष्ठियों ने देश के क्षितिज पर मगध विश्वविद्यालय ने एक अलग स्थान बनाया है। इस कठिन दौर में वेब गोष्ठी एक सशक्त माध्यम है। वेबीनार में प्रो सुधीर कुमार मिश्र, प्रो निभा सिंह, प्रो के के सिंह आरा, प्रो राजेश कुमार प्रयागराज,  प्रो विनोद कुमार सिंह प्रो जावेद अशरफ, प्रो शमशुल इस्लाम, डॉ के के मिश्र, डॉ कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी, डॉक्टर तेजी ईशा, डॉ परम प्रकाश राय, डॉ स्मिता, अश्वनी कुमार सोनी कुमारी डॉक्टर रीता सिंह डॉक्टर शुभा सिंहा डॉक्टर सुषमा तिवारी प्रो कुसुम कुमारी पूर्व प्रति कुलपति सहित देशभर से शिक्षक व शोधार्थी जुड़े रहे। गृह विज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ दीपशिखा पाण्डेय ने नारी के सम्मान में एक कविता की प्रस्तुति के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा संस्कृत विभाग की। सहायक आचार्य डॉ ममता मेहरा ने आभार प्रकट किया। नोडल अधिकारी डॉ संजय कुमार ने तकनीकि सहायता प्रदान की।

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