पेट दर्द लेकर पहुंची युवती को लगा दिया कुत्ता काटने वाला इंजेक्शन! गोपालगंज सदर अस्पताल की लापरवाही से मचा हड़कंप, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
गोपालगंज/सिटी हलचल न्यूज़
बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पेट दर्द की शिकायत लेकर इलाज कराने पहुंची एक युवती को कथित तौर पर पेट दर्द की दवा देने के बजाय एंटी रैबीज यानी कुत्ता काटने पर लगाया जाने वाला इंजेक्शन लगा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इंजेक्शन लगाने से पहले युवती की पर्ची और इलाज की जरूरत की सही तरीके से जांच तक नहीं की गई। मामला सामने आने के बाद सदर अस्पताल में हड़कंप मच गया। परिजनों ने इसकी शिकायत सिविल सर्जन से की है।मामला गोपालगंज सदर अस्पताल का है। नगर थाना क्षेत्र के एकडेरवां की रहने वाली रिया कुमारी के पेट में अचानक दर्द शुरू हुआ। इसके बाद परिजन उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां ओपीडी में डॉक्टर ने उसकी जांच की और पेट दर्द की दवा लिख दी।
दवा लेने पहुंची युवती को भेज दिया एंटी रैबीज वार्ड
आरोप है कि डॉक्टर से पर्ची लिखवाने के बाद जब रिया दवा लेने अस्पताल के दवा वितरण केंद्र पहुंची तो उसे एंटी रैबीज इंजेक्शन वार्ड में भेज दिया गया। वहां मौजूद नर्स ने कथित तौर पर बिना पर्ची की सही तरीके से जांच किए ही उसे एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगा दिया।युवती पेट दर्द का इलाज कराने अस्पताल पहुंची थी, लेकिन उसे ऐसा इंजेक्शन लगा दिया गया, जिसका इस्तेमाल कुत्ते या अन्य संक्रमित जानवर के काटने के बाद रेबीज से बचाव के लिए किया जाता है।
दर्द से राहत नहीं मिली तो खुला लापरवाही का मामला
इंजेक्शन लगने के कुछ देर बाद भी जब युवती के पेट दर्द में आराम नहीं मिला तो परिजनों ने अस्पताल कर्मियों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान उन्हें कथित तौर पर पता चला कि युवती को पेट दर्द की दवा के बजाय एंटी रैबीज इंजेक्शन लगा दिया गया है।
इसके बाद परिजनों ने अस्पताल में विरोध जताया और संबंधित स्वास्थ्यकर्मी के खिलाफ सिविल सर्जन से शिकायत की। घटना ने अस्पताल की दवा वितरण और इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सिविल सर्जन ने दिए जांच के संकेत
मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन ने जांच कराने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि यदि जांच में संबंधित कर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना केवल एक स्वास्थ्यकर्मी की कथित लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से जुड़े बड़े सवाल खड़े करती है। अस्पताल में दवा वितरण और इंजेक्शन लगाने जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में यदि मरीज की पर्ची तक सही तरीके से नहीं देखी जाती है तो मरीजों की जान और स्वास्थ्य दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
बिहार में सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाने, मुफ्त इलाज और दवाओं की उपलब्धता के दावे लगातार किए जाते हैं। लेकिन गोपालगंज सदर अस्पताल की यह घटना जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी और जवाबदेही की स्थिति पर सवाल खड़े करती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि पेट दर्द का इलाज कराने पहुंची युवती को कुत्ता काटने वाला इंजेक्शन आखिर किस आधार पर लगा दिया गया? क्या अस्पताल में मरीजों की पहचान और दवाओं की जांच की कोई व्यवस्था नहीं है? अगर पर्ची देखने में इतनी बड़ी चूक हो सकती है तो दूसरे मरीजों की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा?
अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी पर वास्तव में कोई कार्रवाई होती है या मामला केवल आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है।

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