पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव
पूर्णिया: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के पूर्णिया आगमन और भाजपा की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस की बुद्धिजीवी एवं नीति समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर आलोक कुमार ने भाजपा पर सीमांचल में धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सीमांचल की पहचान हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब, आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द की रही है। भाजपा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए इस क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।प्रो. आलोक कुमार ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम समेत सभी समुदायों के लोग सीमांचल में वर्षों से मिल-जुलकर रहते आए हैं। ऐसे में असम के मुख्यमंत्री का दौरा और भाजपा की पदयात्रा राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा धार्मिक मुद्दों को आगे कर जनता का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाना चाहती है
'वोट चोरी' के सवालों से ध्यान भटकाने का लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि वर्तमान समय में देश के सामने लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता सबसे बड़ा सवाल है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष लगातार 'वोट चोरी' के आरोपों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहा है। ऐसे समय में भाजपा को इन सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि धार्मिक मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान भटकाना चाहिए।उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति का पुराना तरीका रहा है कि जब जनता महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही पर सवाल उठाती है, तब धार्मिक एवं सांप्रदायिक मुद्दों को प्रमुखता दी जाने लगती है।
सीमांचल के चुनावी समीकरण पर भी उठाए सवाल
प्रो. आलोक कुमार ने पिछले विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि सीमांचल में ऐसे प्रत्याशियों को भी एनडीए का उम्मीदवार बनाया गया, जिनसे स्थानीय जनता का बहुत अधिक परिचय नहीं था। चुनाव के अंतिम दौर में बड़े नेताओं के प्रचार और हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण के आरोपों ने चुनावी माहौल को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा की चुनावी रणनीति और उसकी मंशा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
'सीमांचल को धार्मिक उन्माद नहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहिए'
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सीमांचल को नफरत नहीं, रोजगार चाहिए। धार्मिक उन्माद नहीं, शिक्षा और स्वास्थ्य चाहिए। जाति-धर्म की राजनीति नहीं, बल्कि विकास और सामाजिक न्याय चाहिए।उन्होंने भाजपा नेताओं से सवाल किया कि आखिर सीमांचल के असली मुद्दों पर चर्चा क्यों नहीं होती? क्षेत्र के युवाओं के रोजगार, किसानों की समस्याओं, बाढ़ और कटाव की समस्या, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तथा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा के नेता कब जवाब देंगे?प्रो. आलोक कुमार ने कहा कि सीमांचल के विकास के लिए इन बुनियादी समस्याओं का समाधान जरूरी है। राजनीतिक यात्राओं और सभाओं में इन मुद्दों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।अंत में उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी के नेतृत्व में लोकतंत्र, संविधान, सामाजिक न्याय और सांप्रदायिक सौहार्द की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगी। उन्होंने दावा किया कि सीमांचल की जागरूक जनता भाजपा की विभाजनकारी राजनीति को समझती है और क्षेत्र के आपसी भाईचारे को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देगी।


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