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20 हजार रुपये के लिए नवजात को बंधक बनाने का आरोप, पुलिस ने दिलाया बच्चा; अस्पताल प्रबंधन पर धमकी देने की शिकायत

 


पूर्णिया में निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप, मजदूर पिता ने के. हाट थाने में दिया आवेदन; अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया गलत

पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव 

पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया स्थित लाइन बाजार के मंगलम कॉम्प्लेक्स में संचालित आनंद बच्चा अस्पताल पर इलाज करा रहे नवजात को बकाया पैसे के लिए बंधक बनाने का गंभीर आरोप लगा है। बच्चे के पिता गुड्डू पासवान का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने 20 हजार रुपये की मांग पूरी नहीं होने पर उनके नवजात बेटे को अपने पास रोक लिया और बच्चे को घर ले जाने से मना कर दिया। पिता के मुताबिक, 112 नंबर पर पुलिस को सूचना देने के बाद पुलिस अस्पताल पहुंची और रात करीब 9:30 बजे बच्चे को वापस दिलाया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधक पर जान से मारने की धमकी देने, जातिसूचक गाली देने और कागज पर अंगूठा लगवाने का आरोप लगाया गया है। मामले में पीड़ित ने के. हाट थाना में आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को बंधक बनाने और धमकी देने के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है।

40 हजार रुपये जमा करने के बाद मांगे 20 हजार और

के. हाट थाना में दिए गए आवेदन के अनुसार, कटिहार जिले के कोढ़ा थाना क्षेत्र के गोंदवाड़ा गांव निवासी गुड्डू पासवान मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। उनकी पत्नी निशा देवी ने 24 अक्टूबर 2026 की शाम करीब सात बजे एक पुत्र को जन्म दिया। आवेदन में बताया गया है कि एक अज्ञात व्यक्ति की सलाह पर नवजात को इलाज के लिए पूर्णिया के लाइन बाजार स्थित आनंद बच्चा अस्पताल में भर्ती कराया गया था।गुड्डू पासवान का आरोप है कि बच्चे के इलाज, दवा, जांच और फीस के नाम पर अस्पताल में 40 हजार रुपये जमा कराए गए। इसके बाद 28 अक्टूबर की सुबह अस्पताल प्रबंधन की ओर से 20 हजार रुपये और जमा करने को कहा गया। मजदूर पिता रुपये की व्यवस्था करने अपने गांव चले गए, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण अतिरिक्त रकम का इंतजाम नहीं कर सके।

बच्चे को घर ले जाने पहुंचे पिता तो रोकने का आरोप

आवेदन में गुड्डू पासवान ने आरोप लगाया है कि रुपये की व्यवस्था नहीं होने पर जब वह शाम को अस्पताल से बच्चे को घर ले जाने पहुंचे, तो अस्पताल संचालक ने बच्चे को अपने पास रोक लिया। आरोप है कि बच्चे की मां निशा देवी को भी वहां से जाने के लिए कह दिया गया। पिता का दावा है कि उनसे जल्द से जल्द 20 हजार रुपये लाने को कहा गया और रकम जमा करने के बाद ही बच्चे को सौंपने की बात कही गई।इसके बाद गुड्डू पासवान ने अपने साथ मौजूद पड़ोसी के मोबाइल नंबर 9693521808 से डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। उनके मुताबिक, पुलिस अधिकारी रात करीब 9:30 बजे अस्पताल पहुंचे और नवजात को वापस दिलाया। हालांकि, पुलिस की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि या कार्रवाई का विस्तृत विवरण फिलहाल सामने नहीं आया है।

पुलिस के जाने के बाद धमकी देने का आरोप

गुड्डू पासवान ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि पुलिस के अस्पताल से जाने के बाद प्रबंधक ने उन्हें अपने चेंबर में बुलाया। वहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जातिसूचक गालियां देते हुए जेल भेजने की धमकी दी गई तथा कुछ कागजों पर उनका अंगूठा लगवा लिया गया। पीड़ित ने आवेदन में अस्पताल के संचालकों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई करने और न्याय दिलाने की मांग की है। 

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को नकारा

दूसरी ओर, आनंद बच्चा अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे को बंधक बनाने, धमकी देने और दुर्व्यवहार करने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। प्रबंधन का कहना है कि बच्चे का इलाज मानवता के आधार पर बिना पूरी राशि मिले भी किया गया। जब भुगतान की बात आई तो मरीज के परिजन बदसलूकी पर उतर आए। प्रबंधन के अनुसार, परिजन गरीब तबके से थे, इसलिए उन्हें जाने दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट कहा कि बच्चे को बंधक बनाने और धमकी देने की बात पूरी तरह गलत है।

अब जांच और कार्रवाई पर टिकी नजर

एक ओर मजदूर पिता ने नवजात को बंधक बनाने और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है, वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों को गलत बताया है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस की जांच अहम होगी। यह स्पष्ट होना बाकी है कि अस्पताल में भुगतान को लेकर वास्तव में क्या हुआ, बच्चे को वापस दिलाने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा या नहीं और शिकायत में लगाए गए अन्य आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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