किशनगंज रेलवे स्टेशन पर असहाय अवस्था में मिली एक महिला को महिला वन स्टॉप सेंटर सह महिला हेल्पलाइन, पुलिस प्रशासन और सामाजिक सहयोग के संयुक्त प्रयास से सुरक्षित उसके परिजनों से मिला दिया गया। महिला अपने घर और परिवार के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं थी, लेकिन हेल्पलाइन टीम की धैर्यपूर्ण काउंसलिंग और लगातार प्रयासों से उसकी पहचान कर परिवार तक पहुंच बनाई गई।
जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन पर एक महिला के असहाय अवस्था में होने की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित संरक्षण में लेकर आगे की कार्रवाई के लिए महिला हेल्पलाइन वन स्टॉप सेंटर भेज दिया।
वन स्टॉप सेंटर पहुंचने पर महिला काफी घबराई हुई थी और वह अपने घर का पता, परिजनों का नाम या अन्य आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से नहीं बता पा रही थी। इसके बाद डीपीओ अंकिता सिंह की निगरानी में केंद्र प्रशासक रोशनी परवीन और उनकी टीम ने संवेदनशील तरीके से कई चरणों में महिला की काउंसलिंग की।
बातचीत के दौरान मिले छोटे-छोटे संकेतों, मोबाइल फोन में उपलब्ध जानकारी और अन्य तथ्यों के आधार पर टीम ने महिला के परिजनों की तलाश शुरू की। लगातार प्रयासों के बाद पता चला कि महिला का मायका पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के हरिश्चंद्रपुर में है। वहीं, उसके पति का पैतृक घर बिहार के मोतिहारी में है और वह वर्तमान में दिल्ली में टैक्सी चालक के रूप में कार्यरत हैं।
इसके बाद महिला हेल्पलाइन ने उसके मायके पक्ष और पति से संपर्क स्थापित किया। सूचना मिलने पर महिला के पिता और अन्य परिजन वन स्टॉप सेंटर पहुंचे, जबकि महिला के पति ने भी दिल्ली से किशनगंज आने की जानकारी दी। पहचान सत्यापन, काउंसलिंग और आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद महिला को सुरक्षित रूप से उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।
इस संबंध में जेईबी न्यूज से बातचीत में किशनगंज एसडीपीओ ने बताया कि रेलवे स्टेशन पर महिला के लावारिस अवस्था में होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। महिला के साथ एक छोटा बच्चा भी था, इसलिए दोनों को एक रात के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में रखा गया। अगले दिन महिला को महिला हेल्पलाइन वन स्टॉप सेंटर को सौंप दिया गया, जहां आवश्यक काउंसलिंग और अन्य प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित रूप से उसके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
महिला हेल्पलाइन वन स्टॉप सेंटर की संवेदनशील कार्यशैली, धैर्यपूर्ण काउंसलिंग और पुलिस प्रशासन के समन्वित प्रयास से एक असहाय महिला को उसके परिवार से सुरक्षित मिलाने में सफलता मिली।
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