मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड के बाद पूर्णिया सांसद पप्पू यादव पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे। अस्पताल में लगी आग में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात कर उन्होंने गहरी संवेदना व्यक्त की और एक मृतक के परिजन को तत्काल 20 हजार रुपये की नकद सहायता राशि प्रदान की। इसके साथ ही उन्होंने सभी मृतकों के परिवारों को 20-20 हजार रुपये तथा घायलों को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की।
अग्निकांड में घायल मरीजों का हाल जानने के लिए पप्पू यादव ने उन अस्पतालों का भी दौरा किया, जहां घायलों का इलाज चल रहा है। उन्होंने चिकित्सकों से मरीजों की स्थिति की जानकारी ली और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया।
इस दौरान सांसद पप्पू यादव ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में अस्पताल सेवा अब सेवा नहीं बल्कि कारोबार बन चुकी है। उन्होंने कहा कि बिहार में अस्पताल माफियाओं का साम्राज्य चल रहा है और मरीजों को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है।
उन्होंने कहा, "अगर बिहार के सभी निजी अस्पतालों, स्कूलों और कोचिंग संस्थानों की जांच करा ली जाए तो अधिकांश संस्थानों के पास आवश्यक कागजात, सुरक्षा प्रमाणपत्र और मानकों के अनुरूप सुविधाएं नहीं मिलेंगी। राज्य में नियमों का पालन कराने वाली व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है।"
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि कई निजी अस्पताल मरीजों का इलाज करने के बजाय उन्हें कमाई का साधन समझते हैं। बिना जरूरत के महंगी जांचें कराई जाती हैं, अनावश्यक दवाइयां लिखी जाती हैं और कई बार मरीजों को बेवजह आईसीयू में भर्ती रखकर उनके परिजनों का आर्थिक और मानसिक शोषण किया जाता है।
उन्होंने कहा कि अस्पतालों की नियमित जांच करना जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है, लेकिन वर्षों तक कोई प्रभावी जांच नहीं होती। सांसद ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार के कारण कार्रवाई नहीं होती और नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थान बच निकलते हैं। उन्होंने कहा कि ऊपर से लेकर नीचे तक अधिकारियों तक पैसा पहुंचता है, इसलिए सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले अस्पतालों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं हो पाती।
सांसद ने कहा कि मुजफ्फरपुर की यह घटना कोई सामान्य हादसा नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता और स्वास्थ्य व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार का परिणाम है। यदि समय-समय पर अस्पतालों का निरीक्षण होता और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित कराया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा पीड़ित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए। साथ ही राज्यभर के निजी अस्पतालों, स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के बाद भीषण आग लग गई थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार शॉर्ट सर्किट के बाद आईसीयू में लगे एसी में विस्फोट हुआ, जिससे आग तेजी से पूरे वार्ड में फैल गई। इस दर्दनाक हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 से अधिक लोग झुलस गए। कई मरीजों को गंभीर अवस्था में दूसरे अस्पतालों में रेफर करना पड़ा।
इस घटना ने एक बार फिर बिहार के निजी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन मानकों के पालन और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की निगाहें सरकार की कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।
Post a Comment