पूर्णियां जिले के बनमनखी अनुमंडल से सरकारी विद्यालयों के मिड-डे मील को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के स्वास्थ्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर परिषद वार्ड संख्या 19 स्थित प्राथमिक विद्यालय रिफ्यूजी टोला, मध्य विद्यालय बरयाही और पुलकित मध्य विद्यालय काझी में बच्चों को दिए जा रहे भोजन में मकड़ी और कीड़े मिलने से हड़कंप मच गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकतर सरकारी विद्यालयों में मिड-डे मील की जिम्मेदारी एनजीओ को दी गई है, लेकिन गुणवत्ता पर कोई निगरानी नहीं है। बताया जा रहा है कि स्कूल मॉर्निंग होने के कारण खाना रात में ही बनाकर रख दिया जाता है, जिससे वह बासी और बदबूदार हो जाता है।
घटना की जानकारी मिलते ही बच्चों के अभिभावक घबराकर विद्यालय पहुंच गए। वहीं अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और जांच के दौरान चावल और सब्जी में मकड़ी मिलने की पुष्टि होने पर जमकर हंगामा किया।
विद्यालय के शिक्षक वरुण कुमार ने भी चावल में कीड़ा मिलने की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि एनजीओ द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
इधर नगर परिषद की सभापति संजना देवी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और कहा कि बच्चों ने खुद भोजन की खराब गुणवत्ता की शिकायत की है। उन्होंने साफ कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
घटना के बाद बनमनखी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी समीर कुमार सुमन ने संबंधित एनजीओ से स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि यह पहला मामला नहीं है—इसी विद्यालय में पहले भी खाने में कीड़े मिलने की शिकायत सामने आ चुकी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के कई विद्यालयों में इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं, लेकिन अब तक किसी भी एनजीओ या जिम्मेदार पदाधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बच्चों की सेहत से इस तरह खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा?
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