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मुरलीगंज मे धूम धाम से मनाई गई महर्षि मेंही की 142 वीं जयंती -

मुरलीगंज (मधेपुरा):  महान संत ब्रह्मलीन परम पूज्यपाद महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज की 142 वीं जयंती गुरूवार को प्रखंड क्षेत्र में धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान शहर के झीलचौक स्थित महर्षि मेंही आश्रम के स्वामी शंभू बाबा के संरक्षण मे महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के तैल चित्र को रथ में रखकर जय घोष के बीच भव्य शोभा यात्रा निकाला गया। शोभा यात्रा झील चौक स्थित महर्षि मेंही आश्रम से निकलकर हाट बाजार, मिड्ल चौक, हरिद्वार चौक, गोलबाजार, शांति नगर होते पुनः मेंही आश्रम पहुंचकर समाप्त हुआ। इसके बाद स्तुति विनती, सदग्रंथ पाठ के साथ महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डाला गया। शोभा यात्रा निकालने मे रघुनंदन शर्मा, अनिल वर्मा, सुनिल भगत, अशोक अग्रवाल, विवेकानंद शर्मा, शैलेन्द कुमार उर्फ कालेंद्र यादव, उमेश यादव, जनार्दन यादव, पूनम वर्मा, अहिल्या देवी सहित अन्य सत्यसंग प्रेमीयों का सराहनीय योगदान रहा। वही अन्य सत्संग भवन एवं ग्रामीण क्षेत्रों से महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज की जयंती धूमधाम से मनायी गयी।
जोरगामा में भी हुआ सत्संग का आयोजन: 

 प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत जोरगामा गांव के वार्ड 4 में सत्संग प्रेमी अरुण लाल दास के घर पर प्रात: कालीन स्तुति विनती व भजन कीर्तन, सामूहिक ध्यान अभ्यास का आयोजन किया गया। इस दौरान अरुण लाल दास ने प्रवचन देते हुए कहा महर्षि मेंहीं परमहंस जी महाराज का अवतरण सन 1885 ई. में बैसाख माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी पर मधेपुरा जिला के खोखसी श्याम गांव स्थित उनके ननिहाल में हुआ था। संत शिरोमणि महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज का जीवन सत्य, साधना, ज्ञान और मानव सेवा का अद्भुत उदाहरण है। प्रारंभ से ही उनका झुकाव आध्यात्म एवं ईश्वर भक्ति की ओर रहा। कठोर साधना, तपस्या और आत्मज्ञान के बल पर उन्होंने संतमत-सत्संग परंपरा को नई ऊंचाई दी। महर्षि मेंही जी ने अपना संपूर्ण जीवन मानव समाज को सत्य, अहिंसा, सदाचार और ध्यान योग का मार्ग दिखाने में समर्पित कर दिया। उन्होंने वेद, उपनिषद, गीता और संत साहित्य के सार को सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाया, ताकि आम लोग भी आध्यात्मिक ज्ञान से जुड़ सकें। उन्होंने कहा कि महर्षि मेंही परमहंस जी केवल संत नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने जात-पात, ऊंच-नीच से ऊपर उठकर मानवता, प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया। उनके विचार और आदर्श आज भी समाज को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं। उनकी जयंती हमें उनके बताए साधना, नैतिकता और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है। उनके चरणों में नमन करते हुए, हमें उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारने और आत्मकल्याण के मार्ग पर अग्रसर होने का संकल्प लेना चाहिए। उनके दिव्य आदर्श सदैव हम सबका मार्गदर्शन करें।  उनके बताए हुए रास्ते पर चलकर अपने जीवन को धन्य धन्य करें। मौके पर प्रभाष लाल दास, दीपक कुमार, रिप्पू वर्मा, अभिषेक कुमार, सात्विक वर्मा, निर्मला देवी, ज्योति कुमारी सहित दर्जनों सत्संग प्रेमी मौजूद रहे।

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