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आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषण की पोटली व थाल सजा कर गर्भवती माताएं की गई गोदभराई की रश्में अदा।


शनिवार को कोढ़ा प्रख़ड के सभी आंगनवाड़ी केन्द्रों पर  गोदभराई कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें छह माह से उपर , सातवें माह प्रवेश कर रही नौ महीने की बीच की गर्भवती महिलाओं की गोदभराई की गयी। इस दौरान गर्भवती महिलाओं व बच्चों के देखभाल को लेकर कई जानकारी भी दी गयी। इस दौरान प्रखंड के फुलवरिया, पंचायत के आंगनवाड़ी केन्द्र संख्या फुलवरिया पश्चिम, समेत मखदमपुर , पवई, मुसापुर, रामपुर,नगर पंचायत कोढा, समेत अन्य केंद्रों पर गर्भवती महिलाओं को लाल चुनरी ओढ़ा कर एवं माथे पर लाल टीका लगा कार्यक्रम की शुरुआत की गई जहां इस अवसर पर महिला पर्यवेक्षिका राज श्री एवं शशि सिन्हा भी मौजूद रहीं। महिलाओं को विभिन्न व्यंजनों में शामिल सतरंगी फल, सूखे मेवे भी भेंट की गयी।इस दौरान पोषक आहार में फल , हरेदार पत्तेदार साग सब्जियां और मेवे का स्लाट को सजा कर षोषन को लेकर मौजूद ग्रामीणों जागरूक किया गया। महिला पर्यवेक्षिका  ने बताई की  गर्भावस्था के दौरान पोषक आहार सेवन के विषय में गर्भवतियों को भी जागरूक किया गया,साथ ही गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक आहार व ससमय टीकाकरण को लेकर जागरूक किया गया।इस संबंध में कोढ़ा आईसीडीएस के सीडीपीओ  ऊषा किरण ने बताई कि गोदभराई कार्यक्रम प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों पर आयोजित किया गया। जिसमें की गर्भ के आखिरी महीनों में शरीर को अधिक पोषक तत्वों की जरूरत होती है।गर्भवती महिलाओं को गर्भ के दौरान पौष्टिक आहार में प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट के साथ वसा की भी मात्रा होना जरुरी होता है।जो की गर्भवती महिलाओं के लिए अति आवश्यक होता  है।इसके लिए समेकित बाल विकास योजना के अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों में गर्भवती महिलाओं को प्रत्येक माह पुष्टाहार का भी वितरित किया जाता है।

गर्भावस्था के आखिरी दिनों में अधिक पोषण की  जरूरत होती है -- सीडीपीओ।


 सीडीपीओ उषा किरण ने बताई कि गोदभराई का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था के आखिरी दिनों में बेहतर पोषण की जरूरत के विषय में गर्भवतियों को अवगत कराना है। गर्भावस्था के आखिरी दिनों में अधिक पोषण की जरूरत होती है। माता एवं गर्भस्थ शिशु के बेहतर स्वास्थ्य एवं प्रसव के दौरान होने वाली संभावित जटिलताओं में कमी लाने लाने के लिए गर्भवती के साथ परिवार के लोगों को भी अच्छे पोषण पर ध्यान देना चाहिए। बेहतर पोषण एक स्वस्थ बच्चे के जन्म में सहायक होने के साथ गर्भवती महिलाओं में मातृ मृत्यु दर में कमी भी लाता है।

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