कटिहार। कोढ़ा अंचल से जुड़े एक समाचार के प्रकाशन के बाद पत्रकारों को खुलेआम जान से मारने की धमकी दिए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ कही जाने वाली स्वतंत्र पत्रकारिता पर सीधा हमला मानी जा रही है।
05 जनवरी 2026 को इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में कोढ़ा अंचलाधिकारी संजीव कुमार तथा बांसगाड़ा व कोढ़ा अंचल के कर्मचारी सरोज ठाकुर की कथित लापरवाही से संबंधित खबर प्रकाशित की गई थी, जिसे विभिन्न समाचार माध्यमों ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
खबर के प्रकाशन से आक्रोशित होकर 06 जनवरी 2026 को शाम करीब तीन बजे कोढ़ा के उपप्रमुख महेश प्रसाद मेहता उर्फ महेश्वरी मेहता ने प्रिंट मीडिया के मोबाइल नंबर पर फोन कर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकारों को भी धमकाया। कॉल के दौरान उपप्रमुख ने न केवल अभद्र एवं अशोभनीय भाषा का प्रयोग किया, बल्कि जान से मारने की खुली धमकी देते हुए कहा कि “इस बार चार पत्रकारों को चिन्हित कर रखा गया है, ऐसा काम करेंगे जो आज तक किसी ने नहीं किया होगा।”
धमकी भरे कॉल में उपप्रमुख ने यह भी कहा कि “तुम लोग मेरे ब्लॉक और कार्यालय क्यों जाते हो, ब्लॉक मेरा है।” उन्होंने अपनी दबंगई दिखाते हुए यह भी कहा कि “हम पर पहले से ही 17 केस दर्ज हैं, हमें पुलिस-प्रशासन से कोई डर नहीं है। एक और केस हो जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा।” इतना ही नहीं, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई भी पत्रकार ब्लॉक परिसर में नजर आया तो उसे छोड़ा नहीं जाएगा। इस दौरान लगातार गाली-गलौज और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग भी किया गया। बताया जा रहा है कि यह पहला मौका नहीं है। इससे पूर्व भी उपप्रमुख द्वारा चार पत्रकारों पर कथित रूप से झूठे मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं, जबकि पत्रकारों की ओर से तीन बार उनके खिलाफ न्यायालय में सनहा दर्ज कराया जा चुका है।
इस घटना के बाद से कोढ़ा के पत्रकारों में भय का माहौल व्याप्त है। पत्रकारों का कहना है कि जो लोग समाज की आवाज बनते हैं, वे आज खुद असुरक्षा और दहशत के माहौल में काम करने को मजबूर हैं। पत्रकार संगठनों और बुद्धिजीवियों ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यदि देश के चौथे स्तंभ को इस तरह दबंग और माफिया प्रवृत्ति के लोगों द्वारा डराया जाएगा, तो जनता के सवाल कौन उठाएगा।
मामले को लेकर पत्रकार संगठनों ने जिला प्रशासन से आरोपी उपप्रमुख के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा सभी पत्रकारों को सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर और लोकतंत्र से जुड़े मामले में क्या ठोस कदम उठाता है।
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