पूर्णियां/बालमुकुन्द यादव
पूर्णिया : पूर्णिया एवं अररिया जिले में बच्चों में व्यवहार परिवर्तन, सफ़लता, सुरक्षा, सहभागिता एवं बच्चों के विकास से संबंधित एक अहम बैठक बुधवार को समाहरणालय सभागार में हुई । जिला प्रशासन एवं यूनिसेफ की इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता प्रमंडलीय आयुक्त मनोज कुमार ने की। बैठक में प्रमंडलीय आयुक्त मनोज कुमार ने कहा कि पूर्णिया एवं अररिया के बच्चों के हित को लेकर यूनिसेफ द्वारा चलाया गया कार्यक्रम बेहद जरूरी है। इसके लिए हम सभी को साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस एवं शिक्षा विभाग सहित अन्य सभी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मियों को अपनी कार्य शैली में सुधार लाना होगा। इसके लिए पंचायती राज से जुड़े जनप्रतिनिधियों, जीविका दीदी, आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी सेविकाओं के साथ आपसी समन्यवय स्थापित कर काम करना होगा। प्रमंडल के पूर्णिया एवं अररिया ज़िले में यूनिसेफ के सहयोग से आगामी योजना में विभिन्न कार्यक्रमों को शामिल किया गया है। जिसके साथ जुड़ कर कार्य करने से गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं ज़िले के नागरिकों को आसानी से उपलब्ध हो जाएगी
यूनिसेफ वर्तमान में पांच प्राथमिकताओं को केन्द्र बिंदु मानकर कार्य कर रही: यूनिसेफ बिहार प्रमुख
बैठक में यूनिसेफ बिहार की प्रमुख नसिफ़ा बिंते साफ़िक ने कहा कि यूनिसेफ वर्तमान समय में पांच प्राथमिकताओं को केन्द्रबिंदु मानकर कार्य कर रही है। जिसमें बच्चों का विकास, बुनियादी शिक्षा, लिंग के आधार पर समानता (इसमें लड़कियों की शिक्षा शामिल भी है), बच्चों का हिंसा से बचाव, बाल-श्रम, शोषण, एचआईवी एड्स एवं बच्चों के अधिकारों के वैधानिक संघर्ष के लिए काम किया जाता है। उन्होंने बताया यूनिसेफ मुख्य रूप से शिशु एवं मातृ स्वास्थ्य, गर्भवती महिलाओं में खून की कमी, बच्चों में कुपोषण के उपचार के लिए दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध कराती है। साथ ही जीवन रक्षक टीके, एचआईवी पीड़ित बच्चों व उनकी माताओं के लिए दवा की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाती है
ज़िले के प्रखंडों से पांच-पांच पंचायतों का किया जाएगा चयन: जिलाधिकारी
वहीं जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हुई सेवाओं की गुणवत्ता में पहले की अपेक्षा सुधार हुआ है। बताया कि जिले के सभी प्रखंडों से पांच-पांच पंचायतों का चयन करना होगा। जहां यूनिसेफ के सहयोग से स्वास्थ्य विभाग एवं आईसीडीएस के द्वारा मॉडल बनाया जाएगा। उनके मुताबिक ज़िले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर किशोरी एवं बालिकाओं के साथ बैठक कर विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा करने की आवश्यकता है। बच्चों में सामाजिक स्तर पर व्यवहार में परिवर्तन, उसकी सुरक्षा, सहभागिता के अलावा उसका विकास होना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग को सहयोग करने वाली संस्था यूनिसेफ के द्वारा लगभग 21 तरह के मापदंड होते हैं जिसके माध्यम से गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद उसका आकलन किया जाता है। इस बैठक में पूर्व आईएएस अधिकारी सह यूनिसेफ के वरीय सलाहकार रजनीश कुमार महाजन, जिला उपविकास आयुक्त साहिला, सिविल सर्जन डॉ अभय प्रकाश चौधरी, जिला शिक्षा पदाधिकारी शिवनाथ रजक, आईसीडीएस की डीपीओ रजनी गुप्ता, डीपीएम सोरेंद्र कुमार दास, डीपीआरओ दिलीप सरकार, यूनीसेफ के योजना विशेषज्ञ प्रसन्ना, स्वच्छता विशेषज्ञ प्रभाकर सिन्हा, प्रैक्सिस इंस्टीट्यूट फॉर पार्टिसिपेटरी प्रैक्टिस के वरीय कार्यक्रम प्रबंधक धीरज कुमार, सिफ़ार के धर्मेंद्र रस्तोगी, यूनिसेफ के शिव शेखर आनंद एवं देबाशीष घोष सहित कई अन्य अधिकारी उपस्थित थे।



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