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खगड़िया के साथ सभी ने फरक-किया

खगड़िया ब्यूरो/विजय कुमार मौर्य की रिपोर्ट
21वी सदी में प्रवेश कर जाने के बाद भी खगड़िया जिला का समुचित विकास आज तक नहीं हो पाया है। अन्य जिले के विकास में और खगड़िया जिला के विकास में काफी "फरक' है, या यूं कहें कि केंद्र और राज्य सरकार  भी खगड़िया के विकास करने में अन्य जिले से "फरक" कर रही है। "फरक" करने की यह  नीति आज से नही बल्कि 16वी सताब्दी से चली आ रही है।
वर्ष 1943 में खगड़िया को अनुमंडल का दर्जा मिला था, तब यह मुंगेर जिला के अंतर्गत आता था। खगड़िया में पांच बड़ी नदियाँ यथा गंगा, गंडक, वागमती, कमला एंव कोशी की वजह से बार बार बाढ़ आना एक वार्षिक घटना है, जिसका निराकरण किसी सरकार ने नहीं किया। मजबूरन यहाँ के मजूदरो का बिहार से बाहर पलायन जारी है।
मध्यकालीन के समय 16 वीं शताब्दी में नवाब अकबर के शासन काल में नवाब ने अपने राज्य की जमीन की पैमाइश करने के लिए टोडरमल को नियुक्त किया था। टोडरमल ने पूरे भारत की जमीन की पैमाइश की, लेकिन जब वह खगरिया की जमीन को पैमाइश करना शुरू किया जो 7 नदियों गंगा, गंडक, कमला, बागमती और कोशी से और संघन जंगलों से घिरा हुआ था। कई बार पैमाइश करने के बाद भी सही पैमाइश नहीं हो पाया।नदियों की वजह से खगड़िया जिला का क्षेत्र दहनाल था | इसकी भौतिक अवस्थिति के कारण महत्वपूर्ण स्थल बर्बाद हो गया | इसलिए यहाँ एक भी ऐतिहासिक महत्व का स्थल नहीं है |
इसलिए टोडरमल ने सलाह दिया की इस क्षेत्र को पैमाइश में शामिल न करें | दुसरे शब्दों में उन्हौने ‘फरक किया’ की नीति अपनायी और इसलिए यह क्ष्रेत्र फरकिया परगना के रूप में भी जाना जाता है |

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