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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स स्वास्थ्य की बैठक हुई

सीतामढ़ी जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला टास्क फोर्स की बैठक बुधवार को समाहरणालय स्थित परिचर्चा भवन में आयोजित की गई। जिलाधिकारी द्वारा पल्स पोलियो अभियान (27 जून से 1 जुलाई) , कालाजार,  जेई, एईएस एवं नियमित टीकाकरण को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। पल्स पोलियो अभियान के समीक्षा के क्रम में जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि अभियान के दौरान सभी बीडीओ प्रतिदिन संध्या ब्रीफिंग अनिवार्य रूप से करेगे। उन्होंने कहा कि संध्या ब्रीफिंग में अनुपस्थित रहने वाले पदाधिकारी पर करवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि माइक्रो प्लान के आलोक में सभी तैयारियां पूरी कर ले। डियूलिस्ट हरहाल में अपडेट कर ले। सभी एसडीओ इसकी सतत मॉनिटरिंग करेगे। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि पर्यवेक्षको को कई प्रखंडो में पिछले अभियान की राशि का भुगतान नही किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि 25 जून तक सभी लंबित भुगतान को हर हाल में निष्पादित कर दे। उन्होंने कहा कि जेई एवम एईएस (चमकी बुखार) को व्यापक जागरूकता एवम ससमय इलाज  के द्वारा हम पूर्ण रूप से  नियंत्रित कर सकते है। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि अब तक चमकी बुखार के नानपुर में एक, बेलसंड में एक और रुन्नीसैदपुर में दो एवम बाजपट्टी में एक मामले आये। कुल चार मामले आए जिसे ससमय इलाज के द्वारा पूर्ण रूप से ठीक कर लिया गया है। मुजफ्फरपुर एसकेएमसीएच में  एक कि मृत्यु हुई जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि एक बार पुनः सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने अपने संबधित आशा, एएनएम,आदि को वर्चुअल माध्यम से चमकी बुखार से सबंधित उन्मुखीकरण कार्यक्रम जरूर करे। उन्होंने जिला परिवहन पदाधिकारी को निर्देश दिया कि मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना अंतर्गत टैग वाहनों की सतत मॉनिटरिंग करे ताकि पीड़ित बच्चे को ससमय इलाज हेतु नजदीकी अस्पताल में पहुँचाया जा सके। उन्होंने ऐसे सभी वाहनों को तत्काल भुगतान देने का भी निर्देश दिया।। चमकी बुखार को लेकर क्या करे एवम क्या नही करे से संबधित बातों को आंगनबाड़ी सेविका/सहायिका, आशा एवम जीविका दीदियां अपने-अपने क्षेत्र में व्यापक प्रचार प्रसार करे। पम्लेट,बैनर,फ्लैक्स आदि के माध्यम से भी जागरूकता का निर्देश डीएम द्वारा दिया गया। उन्होंने कहा कि अच्छे कार्य करने वाले अधिकारियों एवम कर्मी को पुरस्कृत किया जाएगा। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि  चमकी बुखार से प्रभावित क्षेत्रो के लोगो की सामाजिक-आर्थिक सर्वे कर उन्हें राशन कार्ड,आवास,बच्चों को आंगनबाड़ी की सुविधाएं,ससमय एम्बुलेंस की उपलब्धता आदि की व्यवस्था करें, ताकि चमकी बुखार को जिले से समाप्त किया जा सके। समीक्षा के क्रम में यह पाया गया की  सभी अस्पतालों में चमकी बुखार को लेकर बेड सुरक्षित है।    उन्होंने कहा कि चार विशेष रूप से प्रभावित प्रखंडो यथा रुन्नीसैदपुर, डुमरा,सोनवर्षा एवम नानपुर में वरीय अधिकारियों को मोनिटरिंग की जबाबदेही दी गई है। एम्बुलेंस के अतिरिक्त मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के लगभग 1100 वाहनों को भी टैग किया गया है। जिलाधिकारी ने कहा कि यह एक गंभीर बीमारी है जो ससमय इलाज से पूरी तरह से ठीक हो सकती है। अत्यधिक गर्मी एवं नमी के मौसम में यह बीमारी फैलती है। 1 से 15 वर्ष तक के बच्चे इस बीमारी से ज्यादा प्रभावित होते हैं।मस्तिष्क ज्वर के लक्षण
-सर दर्द, तेज बुखार आना जो पांच 7 दिनों से ज्यादा का ना हो।
पूरे शरीर या किसी खास अंग में लकवा मार देना या हाथ पैर का अकड़ जाना।बच्चे का शारीरिक एवं मानसिक संतुलन ठीक ना होना।शरीर में चमकी होना अथवा हाथ पैर में थरथराहट होना।अर्ध चेतना एवं मरीज में पहचानने की क्षमता नहीं होना/ भ्रम की स्थिति में होना /बच्चे का बेहोश हो जाना आदि प्रमुख लक्षण है। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है कि मरीज को ससमय चिकित्सा उपलब्ध करवाना। चिकित्सीय परामर्श में विलंब के कारण मरीज की स्थिति गंभीर हो सकती है
सामान्य उपचार एवं सावधानियां
अपने बच्चों को तेज धूप से बचाए, गर्मी के दिनों में बच्चों को ओआरएस अथवा नींबू,पानी, चीनी का घोल पिलाएं, 
रात में बच्चों को भरपेट खाना खिला कर ही सुलाएं,
अपने बच्चों को दिन में दो बार स्नान कराएं।क्या करें
-तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोछे एवं पंखा से हवा करें ताकि बुखार 100 डिग्री से कम हो सके।
चमकी आने की दशा में मरीज को बाएं या दाएं करवट में लिटा कर ले जाए। बच्चे के शरीर से कपड़े हटा ले एवं गर्दन सीधा रखें। अगर मुंह से लार या झाग निकल रहा हो तो साफ कपड़े से पोछे, जिससे कि सांस लेने में कोई दिक्कत ना हो। 
-तेज रोशनी से बचाने के लिए मरीज की आंखों को पट्टी या कपड़े से ढके। यदि बच्चा बेहोश नहीं है तब साफ एवं पीने योग्य पानी में ओ आर एस का घोल बनाकर पिलाएं।क्या ना करें
-बच्चे को खाली पेट लीची या फल ना खिलाए, अधपके अथवा कच्चे लीची या फल के सेवन से बचें। 
बच्चे को कंबल या गर्म कपड़े में ना लपेटे। बच्चे की नाक बंद नहीं करें। बेहोशी/ मिर्गी की अवस्था में बच्चे के मुंह से कुछ भी ना दे। बच्चे का गर्दन झुका हुआ नहीं रखें। चुकीं यह दैविक प्रकोप नहीं है बल्कि अत्यधिक गर्मी एवं नमी के कारण होने वाली बीमारी है अतः बच्चे के इलाज में ओझा गुनी में समय नष्ट ना करें। मरीज के बिस्तर पर ना बैठे तथा मरीज को बिना वजह तंग ना करें। ध्यान रहे कि मरीज के पास शोर ना हो और शांत वातावरण बनाए रखें।आपातकाल की स्थिति में निशुल्क एंबुलेंस हेतु टोल फ्री नंबर 102 डायल करें।

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