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सुहाग के लम्बी उम्र के लिए सुहागिनों ने किया वट सावित्री पूजन

पूर्णिया: गुरुवार को महिलाओं ने भारतीय परम्परा के अनुसार वट सावित्री पर्व उल्लास पूर्वक मनाया। इस मौके पर अखण्ड वस्त्र एवं सोलह श्रृंगार से सजधज सुहागिनों ने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना हेतु वट वृक्ष पर विधि पूर्वक पूजन किया एवं सुहाग की रक्षा के लिए वट वृक्ष में सुहाग के नाम पिला रोली बांधकर दीर्घायु जीवन की कामना किया ।
 इस मौके पर मीरगंज थानाक्षेत्र के विभिन्न इलाकों में जैसे दमैली, चंपावती, घरारी, बघवा, चंदवा, बहेलियस्थान, बरहकोना, कजरा, मिल्की समेत दर्जनों जगहों पर वट वृक्ष के निकट सुहागिन महिलाओं ने अपनी सुहाग की रक्षा हेतु कथा कहकर विधि पूर्वक पूजा किया तथ्यों के अनुसार वट वृक्ष काफी लंबे उम्र का पौधा होता है, जो कभी बूढ़ा नहीं होता है इसकी हर टहनी से एक नया पौधा का निर्माण होता है और यह पेड़ काफी विशाल हो जाता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वट वृक्ष में मानव से जुड़े कई रहस्य हैं। 
वैसे दन्त कथा के अनुसार सावित्री एवं सत्यवान दोनों पति पत्नी थे। सत्यवान अल्पायु होने के उसकी पत्नी सावित्री को इस बात का पता था कि उनके पति का जीवन मात्र चार दिन बचा है उसके बाद उसने नहाय खाय कर उपवास कर व्रत करने लगी चौथे दिन पति के साथ जंगल सावित्री भी गई। लकड़ी काटने के दौरान सत्यवान को चक्कर आया तो सावित्री समझ गई वह पति को वटवृक्ष की छांव पर लिटाकर भगवान का ध्यान करने लगी। जिसके बाद यमराज उसके पति के प्राण हर कर यमलोक जाने लगे यह देख सावित्री ने यमराज का पीछा करने लगी यमलोक की तरफ आते देख यमराज ने उन्हें 5 अलग-अलग वरदान दिए जिससे उसके पति को एक बार पुनः जीवनदान मिला जिसके बाद से सती सावित्री के इस उपवास को दोहराया जाने लगा। 
प्रत्येक वर्ष वसन्त ऋतु में महिलाएं पारम्परिक लिवास में वट वृक्ष के पास विधि पूर्वक पूजा कर पति के लंबे उम्र की कामना करती है ।

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