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# भवानीपुर में निजी नर्सिंग होम पर निगरानी सवालों के घेरे में, छह माह में दो प्रसूताओं की मौत

 

पूर्णियाँ /बालमुकुन्द यादव 

भवानीपुर प्रखंड क्षेत्र में निजी नर्सिंग होम, जांच घर और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालन पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी सवालों के घेरे में है। पिछले छह महीने में निजी नर्सिंग होम में प्रसव के बाद दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि तीन संस्थानों को सील किया गया है। इसके बावजूद अवैध संचालन की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय स्तर पर आधा दर्जन से अधिक निजी नर्सिंग होम संचालित होने की चर्चा है


छापेमारी में मिली थी अनियमितता

5 मई को बलदेव उच्च विद्यालय के सामने संचालित सवेरा नर्सिंग होम में धमदाहा एसडीओ की छापेमारी के दौरान चिकित्सक की अनुपस्थिति में दो अप्रशिक्षित लोगों द्वारा नवजात का इलाज किए जाने की बात सामने आई थी। आवश्यक कागजात और चिकित्सक की उपलब्धता के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संस्थान को सील कर दिया गया था। हालांकि, आरोप है कि बाद में उसी भवन में दूसरे क्लिनिक का संचालन शुरू हो गया। इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।27 मई को तेलियारी चौक और सर्कल टोला के बीच स्थित लाइफकेयर नर्सिंग होम में ऑपरेशन से प्रसव के बाद कटिहार जिले के कुर्सेला थाना क्षेत्र की निवासी विमला देवी की मौत हो गई थी। वहीं, सोमवार को भवानीपुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या सात स्थित तेज नर्सिंग होम में ऑपरेशन से प्रसव के बाद रुखसार खातून की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया। इसके बाद बीडीओ मनोज कुमार की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नर्सिंग होम को सील कर दिया


जांच के निर्देश के बावजूद निगरानी पर सवाल

एसडीओ अनुपम कुमार ने बताया कि एमआईसी और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निजी नर्सिंग होम, जांच घर और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के निरीक्षण का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में कई बार पत्र जारी करने के साथ बैठकों में भी निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद समय पर जांच नहीं होना और रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।सीएचसी भवानीपुर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरएन सिन्हा ने बताया कि जांच के दौरान किसी भी नर्सिंग होम के पास वैध कागजात नहीं मिले। सभी संस्थानों की रिपोर्ट जिला स्वास्थ्य विभाग को भेज दी गई है और अपने स्तर से भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच की भनक लगते ही संचालक नर्सिंग होम में ताला लगाकर फरार हो जाते हैं


आशा कार्यकर्ताओं की भूमिका की जांच की मांग

निजी नर्सिंग होम तक मरीजों को पहुंचाने में कुछ आशा कार्यकर्ताओं और कथित दलालों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेहतर इलाज का भरोसा देकर मरीजों को निजी संस्थानों तक ले जाया जाता है। लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच सवाल उठ रहा है कि यदि नियमित निरीक्षण किया जा रहा है, तो नियमों के उल्लंघन पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं होती? जांच के दौरान बंद मिलने वाले संस्थानों के वास्तविक संचालन का सत्यापन कैसे किया जाता है? साथ ही, सील किए गए भवन में दूसरे क्लिनिक के संचालन की शिकायत की जांच भी जरूरी है, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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